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समझौते की
गांठ पर वाम का हठ
(वेदप्रताप वैदिक
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कांग्रेस पार्टी को सरकार भंग होने की उतनी चिंता नहीं है,
जितनी समझौता भंग होने की है। संसद का विश्वास खो देने को
वह तैयार है,
लेकिन वह बुश प्रशासन का विश्वास खोने को तैयार नहीं है।
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ताकि जीवंत हो उठे सहकारी आंदोलन
(प्रांजल
धर
)
इस दुनिया में बड़ें-बड़े महानगरों में किसी कोने किनारे पर
बसी झुग्गियाँ है जहां गाँवों से
रोजगार
की तलाश में आए लोग रहते है,
जहां बिजली,
पानी या स्वास्थ्य की सुविधओं का खस्ताहाल है। जहां मानवधिकारों
की हालत चिंताजनक है और जहां देश का भविष्य कहे जाने
नौनिहाल शिक्षा से
फिलहाल
वंचित है। सहकारिता का ताल्लुक शायद इसी दुनिया से है।
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क्यों हुआ हाल बेहाल
(भारतीय
पक्ष ब्यूरो)-
शुगर कोआपरेटिव सोसायटियों की संरचना कुछ इस तरह से है कि
लाभ तो सदस्यों में बांट दिया जाता है,
लेकिन हानी का बोझ सरकार पर डाल दिया जाता है। जिसका फायदा
मिल मालिक बखूबी उठाते है और संस्थान को घाटे में दिखाकर
जहां एक ओर सदस्यों को उन्हे मिलने वाले प्रतिफल
से वंचित कर दिया जाता है,
वहीं सरकार से हानि की भरपाई करनें के लिए अनुदान भी मिल
जाता है।
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