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आवरण कथा |
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सूचना के अधिकार का कानून
फूलों की सेज नहीं है |
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अरविंद केजरीवाल |
प्रश्न : जब आपको
आजमगढ़ की घटना के बारे में पता चला तो आपने इस मसले
को राष्ट्रीय मीडिया में उठाया। टाइम्स
आफ
इंडिया और एन.डी.टी.वी. ने इसे प्रमुखता से कवर
किया। लेकिन ग्रामीणों को सूचना अभी भी नहीं मिली
है। इस संबंध में आप आगे क्या करने वाले हैं।
उत्तर :
मेरे अकेले करने से कुछ नहीं होगा। इसमें तो सभी
लोगों को जुड़ना होगा। सूचना के अधिकार के लिए जो
लोग भी संघर्ष कर रहे हैं,
उनके लिए मैं जो कुछ कर सकता हूं,
जरूर करूंगा। जहां तक आजमगढ़ की
घटना की बात है, तो अभी
मुझे वहां की जमीनी हालात की जानकारी नहीं है। मुझे
नहीं मालूम कि जो लोग जेल गए,
वे इस लड़ाई को
कितनी गंभीरता से आगे लड़ना चाहते हैं। मैं अपनी ओर
से कुछ भी थोपना नहीं चाहता।
आने वाले दिनों में मैं उन लोगों से
बात करूंगा। जरूरत पड़ी तो मैं आजमगढ़ भी जा सकता हूं।
वे लोग भी दिल्ली आकर मुझसे मिल सकते हैं। हम
मिल-बैठकर बात करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।
इसमें कोई शक नहीं कि मैं चाहता हूं हर गांव के लोग
अपने गांव से जुड़ी हर चीज को जानें। सरकार उनके गांव
के लिए क्या कर रही है,
यह तो
उन्हें जानना ही चाहिए। और इसके लिए सूचना के अधिकार
का कानून निश्चित रूप से एक बढ़िया हथियार हो सकता
है।
प्रश्न : मीडिया में जिस ढंग से इस
घटना की कवरेज की गयी,
उससे कहीं यह संदेश तो नहीं गया
कि सूचना के अधिकार का इस्तेमाल एक खतरनाक चीज है,
इससे बच
के रहना चाहिए।
उत्तर :
अगर
कोई सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करने की सोच रहा है
जिससे किसी व्यक्ति या समूह के निहित स्वार्थों पर
आंच आने वाली है तो उसे पलटवार के लिए तैयार रहना
चाहिए। सूचना के अधिकार का इस्तेमाल कोई फूलों की
राह नहीं है। इसके रास्ते में आपको कांटे भी मिलेंगे,
पत्थर भी मिलेंगे। अगर कोई इन
सभी कठिनाइयों को झेलने के लिए तैयार है तभी वह आगे
आए। शुरूआती दौर में जब हमने इस कानून का इस्तेमाल
करना शुरू किया था तो हमें भी तमाम मुश्किलें झेलनी
पड़ी थीं। हमें धमकियां मिलीं और हम पर हमले भी हुए।
हां यहां मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि अगर आप में
हिम्मत है,
आपके इरादे मजबूत हैं तो आपको सफलता
जरूर मिलेगी। सूचना के अधिकार का कानून आपकी जरूर
मदद करेगा।
प्रश्न : जिस ढंग से प्रशासन द्वारा
सूचना मांगने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा है,
उसे देखते
हुए क्या आपको नहीं लगता कि यह कानून असफल साबित हो
रहा है।
उत्तर :
मैं
ऐसा नहीं मानता। आजाद होने के बाद हमारे देश में
भ्रष्टाचार बढ़ा है,
साथ ही और भी कई समस्याएं बढ़ी
हैं, तो क्या हम यह पूछना
शुरू कर देंगे कि हमें आजादी मिलनी चाहिए या नहीं।
सूचना के अधिकार को तो होना ही चाहिए। प्रताड़ित करने
के मामले कानून व्यवस्था से जुड़े हैं,
उन्हें उसी स्तर
पर निपटाना होगा। साथ ही समाज को भी इस मामले में
अच्छाई के साथ और बुराई के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।
प्रश्न : क्या आपको लगता है कि
वर्तमान कानून मे कुछ सुधार की जरूरत है?
उत्तर :
सैध्दांतिक स्तर पर बहुत कुछ कहा जा
सकता है। लेकिन मैं मानता हूं कि कुल मिलाकर कानून
बहुत अच्छा है। जरूरत बस इसे लागू करने और करवाने की
है। |