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 जनवरी,  2008

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  विकलांगो का सहारा

 आशीष कुमार 'अंशु'

दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तारी परिसर में 'केयर विजन' और बीरेश पचीसिया का नाम प्राधयापकों और छात्रों के बीच में परिचित सा है। इस युवा से दिखने वाले समाज सेवी का कार्य क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। वह 'उड़ान' के मंच से जहां विकलांगों के हक की बात करते हैं, वहीं 'केयर विजन' के नए प्रकल्प 'अस्तित्व' के मंच से महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं और अपने 'सुखधाम वृध्दाश्रम' के माधयम से वे बुजुर्गों की सेवा में लगे हैं। वे कहते हैं, 'कई बार आर्थिक संकट की वजह से समाज सेवा का हौसला कमजोर पड़ा लेकिन न जाने कैसे हर बार कोई न कोई हाथ मदद के लिए आगे आया। इसलिए लगता है कि यदि नेक काम के लिए हम आगे बढ़ें तो ईश्वर भी हमारी मदद के लिए आगे आता है।'

'उड़ान' के तत्वावधान में चल रहा विकलांगों का ऑरकेस्ट्रा ग्रुप उनका एक अदभुत प्रयास है। इस बैण्ड को तैयार करने में बीरेश की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वह बताते हैं कि किस तरह कई सारे लोगों ने बैण्ड की मदद करने का अश्वासन देकर वादा पूरा नहीं किया। विकलांगों के साथ छल किया। बीरेश कहते हैं, 'मुझे बैण्ड से कोई लाभ नहीं चाहिए। लेकिन दिल से यह चाहता हूं कि कोई जौहरी आगे आए और इन 'हीरों' की पहचान करे और यह बैण्ड देश ही नहीं देश के बाहर भी स्टेज शो करे।'

मूलत: राजस्थान के श्रीगंगानगर के रहने वाले बीरेश का बचपन पटना में बीता। उन्होंने स्नातक पटना विश्वविद्यालय से किया। उसके आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली आए और दिल्ली के होकर रह गए। सेवा कार्यों के लिए उन्हें पिछले साल 'मानव सेवा प्रेरणा पुरस्कार' मिला। इस युवा समाजसेवी के हौसले बुलन्द हैं और अभी इन्हें तो आगे बहुत लंबा रास्ता तय करना है। लेकिन इसके बावजूद आज महत्वपूर्ण विषय यह है कि बीरेश पचीसिया जैसे लोगों से प्रेरणा लेकर बेसहारों को सहारा देने के लिए कितने लोग आगे आते हैं? खैर! एक बात तो तय है कि जनसेवा की आकांक्षा रखने वाले गों के लिए बीरेश एक प्रेरणाड्डोत अवश्य हैं।

ईमेल: ashishkumaranshu@gmail.com