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जनसेवा |
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शिक्षा दान को बनाया अपना मिशन |
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हर्षिता सिंह |
राजधानी
दिल्ली के दक्षिण पूर्व भाग में एक जगह है मदनपुर
खादर विस्तार। यह मदनपुर खादर गांव से कुछ ही आगे
है। दरअसल यह एक पुनर्वास बस्ती है। कुछ साल पहले
नेहरू प्लेस के समीप स्थित झुग्गी बस्ती को हटाकर
यहां बसाया गया था। यहां तक पहुंचने के लिए न तो
अच्छी सड़कें हैं और न ही बहुतायत में यातायात के
साधन। देखने और सुविधा
की
दृष्टि से लगता ही नहीं कि यह भी दिल्ली का ही एक
हिस्सा है। भरी दोपहरी में भी यहां भिनभिनाते
मच्छरों एवं मक्खियों का सामना करना पड़ता है। दिल्ली
जल बोर्ड का पानी भी उपलब्ध नहीं है। लोग हैंडपंप का
गंधयुक्त पानी पीते हैं। इन कठिन परिस्थितियों के
बावजूद रमेश चन्द्र द्विवेदी यहां जो कुछ कर रहे हैं,
उसकी
मिसाल कम ही मिलती है।
मूलत: उत्तार प्रदेश के गोरखपुर जिले
के रहने वाले श्री द्विवेदी की उम्र लगभग
60 साल है। इस
उम्र में भी वे किसी युवा से कम सक्रिय नहीं हैं,
बल्कि सच्चाई तो यह है कि आज के
अधिकांश युवा भी उनकी बराबरी नहीं कर सकते। एकदम
सुबह-सुबह ही उनकी दिनचर्या शुरू होती है और देर रात
तक चलती रहती है। जीविकोपार्जन के लिए सुबह-शाम
आस-पड़ोस के घरों में 'टयूशन'
पढ़ाते हैं और बाकी समय सामाजिक
कार्यों में लगे रहते हैं। उनका मानना है कि
'यह शरीर जितना अधिाक दूसरे के
काम आ जाए, उतना ही अच्छा
रहता है। इसी में मनुष्य जीवन की सार्थकता भी है।
यदि मनुष्य केवल अपने लिए जीए,
अपने लिए सोचे और अपने लिए ही
कुछ करे तो फिर मनुष्य और पशु में क्या अंतर रह
जाएगा?'
दूसरे के लिए कुछ करने के उद्देश्य
से ही उन्होंने
1996 में श्रीराम शिक्षा पीठ की
स्थापना की थी। इस पीठ के माध्यम से उन्होंने नेहरू
प्लेस के समीप झुग्गी बस्ती के बच्चों को पढ़ाना शुरू
किया। विभिन्न घरों में टयूशन पढ़ाने के बाद वे
झुग्गी बस्ती में जाते और हर मां-बाप से निवेदन करते
कि अपने बच्चों को मेरे पास पढ़ने के लिए भेजें।
देखते ही देखते उनके पास काफी संख्या में बच्चे आने
लगे और वे उन्हें पढ़ाने लगे। यहां पढ़ाई निशु:ल्क थी।
पढ़ाने की गति अभी तेज हुई थी कि सरकार ने उस बस्ती
के लोगों को मदनपुर खादर विस्तार में जगह आवंटित
करके वहां जाने को कहा। फिर और लोगों के साथ-साथ
श्री द्विवेदी भी बोरिया-बिस्तर बांधकर मदनपुर खादर
चले गए। वहां उन्हें एक किराए के मकान में रहना पड़ा,
क्योंकि उन्हें वहां भूमि आवंटित
नहीं हुई थी। किन्तु चूंकि उनके सारे शिष्य मदनपुर
खादर विस्तार में चले गए थे,
इसलिए वे भी वहां पहुंच गए। समाज
के सहयोग से वहां उन्होंने दो कमरे का एक मकान किराए
पर लिया और पुन: उन्हीं बच्चों को पढ़ाने लगे। उनके
इस कदम से अभिभावक भी बड़े प्रभावित हुए। अभिभावकों
ने स्वयं श्री द्विवेदी के सामने प्रस्ताव रखा कि आप
हमारे बच्चों के लिए इतना कुछ कर रहे हैं,
तो हम लोगों को भी सेवा का कुछ
अवसर दीजिए। इसके बाद यह व्यवस्था बनाई गई कि जो
अभिभावक अपने बच्चों का शुल्क दे सकते हैं,
वे दें और जो नहीं देने की
स्थिति में हैं,
उनके बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाया
जाएगा। इस समय अब तक इस शिक्षा पीठ से दो हजार से
अधिक बच्चे शिक्षित हुए हैं।
सम्पर्क:
श्रीराम शिक्षा पीठ इंडियन आयल टावर नं.
2 के सामने,
मदनपुर खादर विस्तार,
नई दिल्ली-65 |