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 जनवरी,  2008

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                                                                     नरेश शांडिल्य

'स्नेह भारती' के नाम से 1989 से चल रहे एक समाज सेवी न्यास को एक सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और कलात्मक गतिविधियों के परिष्कार की पहल के रूप में देखा जा सकता है। यह गैर सरकारी संस्था या न्यास प्रतिबध्द, ईमानदार और संवेदनशील व्यक्तियों का एक ऐसा समूह है, जिसको कि एक 'रोल-माडल' की तरह सबके सामने रखा जा सकता है। इससे जुड़ा एक रेखांकित करने योग्य नाम है डा. सीतेश आलोक। वे हिन्दी जगत् के एक सुपरिचित साहित्यकार तो हैं ही, संगीत और कला में भी उनकी गहनतम रुचि है। उनकी सदैव यही कोशिश रहती है कि आने वाली नई पीढ़ी के पास ये संस्कार कैसे पहुंचे ताकि साहित्य-कला-संस्कृति की हमारी अतिविशिष्ट परंपरा को बचाए रखा जा सके।

डा. सीतेश आलोक अपने न्याय की ओर से प्रतिवर्ष कुछ फरस्कार देते हैं। इसके लिए वे पहले से ही स्थापित व्यक्तियों के अतिरिक्त उन लोगों की खोज भी करते हैं जो आमजन हैं या जो उस तरह से प्रसिध्द नहीं हैं कि वे सहज-सुलभ हों। एक बार उन्होंने मुझे एक नाम और अधरा-सा पता दिया और बताया कि हम इस व्यक्ति को पुरस्कृत करना चाहते हैं... यह एक थ्री-व्हीलर चलाता है... इसने एक व्यक्ति का नोटों से भरा बैग और सामान ईमानदारी की मिसाल कायम करते हुए, वापिस कर दिया था। मित्र के साथ अन्तत: मैंने उस व्यक्ति को खोज निकाला और बाद में उसे सम्मानित किया गया। ऐसे ही एक मछुआरे लड़के को खोजकर उन्होंने सम्मानित किया था। उस लड़के ने यमुना में डूबने से एक व्यक्ति की जान बचाई थी। कहने का तात्पर्य यह है कि एक 'बनी बनाई लकीर' पर चलते हुए यह ट्रस्ट काम नहीं कर रहा बल्कि समाज में एक उदाहरण की तरह इसके लोग काम कर रहे हैं।

इस ट्रस्ट से (स्व.) डा. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी जैसे विधिवेत्ता आजन्म जुड़े रहे। पं. बिरजू महाराज इसके संरक्षकों में से एक हैं। डा. नरेन्द्र कोहली जैसे प्रख्यात साहित्यकार इसके न्यासी हैं। अन्य उल्लेखनीय हस्तियों में डा. प्रतिभा राय, दया प्रकाश सिन्हा, जोगिन्दर पाल, गौरव जैन, ज्ञान प्रकाश आदि शामिल हैं। डा. सीतेश आलोक की पत्नी
(स्व.) डा. अरुणा सीतेश ने इन्द्रप्रस्थ महिला कालेज की प्राचार्य होने की अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए इस ट्रस्ट को अपनी भरपूर सेवाएं दी हैं। इतने प्रतिबध्द पारंगत और कर्मवीर व्यक्तियों के कारण ही यह ट्रस्ट समाज में एक उदाहरण के रूप में हम सबके सामने है। 'जनहित में जारी' इस ट्रस्ट के विज्ञापनों को भारतीय पक्ष और इस जैसी कई अन्य पत्र-पत्रिकाओं में देखा जा सकता है। इससे ट्रस्ट की 'दृष्टि' का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जहां अधिकांश संस्थाएं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर फिलमी नाच-गानों तक सीमित होकर रह जाती हैं, वहीं स्नेह भारती का प्रयास भारतीय शास्त्रीय संगीत तथा नृत्य एवं लोक गीत को प्र
धानता देने के साथ ही नाटय, साहित्य, चित्रकला आदि अन्य माधयमों द्वारा भी देशवासियों की मानसिकता पर प्रभाव डालना है। जिससे लोकजीवन में सृजनात्मकता, आत्म-सम्मान एवं राष्ट्रीय गौरव का विकास हो। विद्यार्थियों में सकारात्मक दृष्टिकोण के बीजारोपण के उद्देश्य से स्नेह भारती ने निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। जिनमें, परहित सरिस धर्म नहिं भाईराष्ट्र का सम्मान है तो हमारी भी पहचान हैऋ सफलता के लिए परिश्रम का कोई विकल्प नहींऋ अपने लिए जिए तो क्या जिए (मेहनत का फल सबसे मीठा) जैसे लेख लिखवा कर देश के भावी कर्णधारों को स्वस्थ चिंतन के लिए प्रेरित किया जाता है। स्नेह भारती के वार्षिक सम्मान-अर्पण समारोह में अदम्य साहस एवं मनोबल प्रदर्शित करने वाले उन व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है जिनको समाचार पत्र-मीडिया आदि लगभग अनदेखा कर देते हैं। कर्तव्यनिष्ठा सम्मान पाने वालों में वे फलिसकर्मी भी होते हैं जो लोभ त्याग कर लाखों की धनराशि ढूंढ कर उनके स्वामी तक पहुंचाते हैं और वे भी जो गोली की बौछार झेलते हुए दुराचारियों से लोहा लेते हैं। इनके अतिरिक्त स्नेह भारती ने उन साधा
रण नागरिकों को साहस सम्मान प्रदान किया है जो कहीं आवश्यकता पड़ने पर किसी संकटग्रस्त व्यक्ति की सहायतार्थ जोखिम उठाने के लिए निकल पड़ते हैं। साथ ही स्नेह भारती ने ऐसे अनेक जीवट वाले व्यक्तियों को फरुषार्थ सम्मान प्रदान किया जो अपनी शारीरिक अथवा आर्थिक सीमाओं को नकारते हुए जीवन में विश्वास के साथ आगे बढ़े हैं।

समाज में एक उपयुक्त वातावरण बनाने के उद्देश्य से स्नेह भारती की समय-समय पर गोष्ठियां होती हैं। जिनमें साहित्य, संगीत आदि के क्षेत्र में स्थापित संगीतज्ञों, लेखकों आदि के साथ ही नवोदित तथा विकलांग कलाकार भी भाग लेते हैं। स्नेह भारती ने नियमित रूप से कुष्ठ निवारण के लिए नेत्र रोगियों के लिए पाठशालाओं में निर्धन विद्याथिर्यों की सहायता के लिए आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया और राष्ट्रीय आपदा के क्षणों में आर्थिक सहयोग भी दिया। साथ ही स्नेह भारती द्वारा भारतीय साहित्य, कला एवं संस्कृति की अंग्रेजी त्रैमासिक पत्रिका 'प्रतिभा इंडिया' का नियमित प्रकाशन भी हो रहा है। स्नेह भारती की गतिविधियों को देखते हुए भारत सरकार ने इस संस्था को दिया हुआ अनुदान धारा 80-जी के अंतर्गत, आयकर से मुक्त कर रखा है।

 राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन