भारतीय मूल्यों पर आधारित वैकल्पिक व्यवस्था की पक्षधर हिन्दी मासिक पत्रिका

 जनवरी,  2008

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एक मिशाल

सिविल सेवा को सुधारने की मुहिम

विमल कुमार सिंह

अंग्रेजों ने भारत पर शासन करने के लिए एक मजबूत अधकारी तंत्र की स्थापना की थी जिसे वे गर्व से 'स्टील फ्रे' कहा करते थे। 1947 में अंग्रेज चले गए, लेकिन उनका स्टील प्रफेम बना रहा। दुर्भाग्यवश अपनी औपनिवेशिक पृष्ठभूमि के कारण स्टील प्रफेम रूपी यह अधिकारी तंत्र आज भी खुद को जनता से जोड़ नहीं पाया है। यह तंत्र स्वयं को जनता का सेवक नहीं बल्कि अपने को शासक मान कर काम करता है। उसका भारतीय परंपराओं एवं लोकजीवन से सरोकार बहुत कम है।

वह जमाना लद गया जब जमींदारों एवं उंफचे खानदान के लोग ही आईएएस, आईपीएस बना करते थे। अब तो गांव-देहात के युवा भी आईएएस, आईपीएस बनने लगे हैं। लेकिन इसे स्टील प्रफेम की महिमा ही कही जाएगी कि वह कुछ ही वर्षों में सीधो-सादे युवाओं को एक 'साहब' में तब्दील कर देती है। अfधकारी तंत्र को ठीक 'रास्ते पर लाने' के लिए देश में आज बहुविध प्रयास किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग आंदोलनों एवं जनदबाव के जरिए नौकरशाही को जनाभिमुख बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में दिल्ली स्थित एक संस्था भारत के जटिल अधिकारी तंत्र को बेहतर बनाने के लिए बड़े बुनियादी स्तर पर काम कर रही है। जन कल्याण शिक्षा समिति के अंतर्गत 'संकल्प' के नाम से चलने वाले इस प्रकल्प के उपाधयक्ष श्री संतोष तनेजा कहते हैं,  ''आमतौर पर यह मान लिया जाता है कि देश को राजनीतिक नेता चलाते हैं। अत: देश के उत्थान व पतन के लिए वही जिम्मेदार होते हैं। परन्तु व्यवस्था को गहराई से जानने वाले यह जानते हैं कि किसी भी देश-तंत्र की रीढ़ की हड्डी उसकी प्रशासनिक व्यवस्था व उसे चलाने वाले प्रशासनिक अधिकारी होते हैं । क्षेत्र की बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, कानून और व्यवस्था आदि से संबंधित समस्याओं को हल करने का दायित्व मुख्यत: प्रशासनिक अधिकारियों का होता है। वे देश-विदेश से जुडे महत्वपूर्ण मसलों पर नीति निर्धारण करने में योगदान करते हैं और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी तो पूरी तरह इन्हीं की होती है। ये वे लोग हैं जो राष्ट्र-मंदिर की नींव को ठोस आधार दे सकते हैं। भारत को समृध्द, शक्तिशाली और श्रेष्ठ बना सकते हैं। इस पृष्ठभूमि में विचार आया कि ईमानदार, सामाजिक रूप से प्रतिबध्द, भारतीय संस्कृति में पोषित, मौलिक एवं कल्पनाशील प्रशासकों के सिविल सेवा में आने से देश में परिवर्तन की प्रक्रिया तेज होगी और लाखों, करोड़ों भारतवासियों के लिए विकास के द्वार खुल सकेंगे। अत: प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को खोजकर उनमें ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम के संस्कार डालने तथा कुशल प्रशासक के रूप में उनका विकास करने के लिए वर्ष 1986 में संकल्प नामक प्रकल्प प्रारंभ हुआ।''

'संकल्प' का उद्देश्य विद्यार्थियों में विश्वसनीयता, संवेदनशीलता, व्यवहारकुशलता, सामाजिक प्रतिबध्दता, उत्कृष्टता, दूरदर्शिता एवं दृढ़ निश्चय आदि गुणों का विकास कर उनको राष्ट्र के प्रति समर्पित प्रशासक की भूमिका प्रदान करना है। राष्ट्र और समाज को नेतृत्व देना कोई साधारण कार्य नहीं है। आसाधारण कार्य असाधारण नेतृत्व क्षमता और गुणों की अपेक्षा रखता है। अत: प्रकल्प विभिन्न गतिविधियों और क्रियाकलापों द्वारा कुछ विशिष्ट गुणों को विद्यार्थियों के जीवन में लाने के लिए सुविचारित ढंग से प्रयास कर रहा है। इस समय संकल्प की गतिविधियां तीन स्तरों पर संचालित की जा रही हैं।

विद्यालय स्तर :

नौवीं कक्षा से मेधावी विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है। विद्यार्थियों का चयन प्रवेश परीक्षा व साक्षात्कार द्वारा किया जाता है। इस चरण में विशेष शिक्षण योजना के अन्तर्गत पत्राचार एवं संपर्क कार्यक्रम द्वारा प्रकल्प के विद्यार्थियों को सामान्य जागरूकता, व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक चेतना, संप्रेषण क्षमता, मूल्यबोध, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा चयनित पाठय-सामग्री उपलब्ध करायी जाती है। चूंकि व्यक्ति पुस्तकों से कम, प्रेरणादायी जीवन से ज्यादा सीखता है, अत: समय-समय पर विद्यार्थियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें विद्वानों, प्रशासकों, समाजसेवियों द्वारा मार्गदर्शन किया जाता है। विद्यालय स्तर पर संकल्प की योजना का महत्वपूर्ण पहलू शैक्षणिक वर्ष के अन्त में दस दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन है। यह शिविर न केवल गतिविधियों की दृष्टि से विशिष्ट और अनूठा है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भी सहायक होता है। समाज समर्पित व्यक्तित्व, अनुभव समृध्द प्रशासक, दिन-रात प्रकल्प की सफलता के लिए जुटे सामाजिक कार्यकर्ता, ज्ञान-विज्ञान के भंडार को बांटने के इच्छुक अधयापकों के साथ रहकर विद्यार्थी समर्पण, प्रतिबध्दता और उत्कृष्टता के जीवंत उदाहरण देखते हैं और उनसे शिक्षा ग्रहण करते हैं।

महाविद्यालय स्तर पर गतिविधियां :

केवल विद्यालय स्तर से ही प्रकल्प का उद्देश्य पूरा नहीं होता। पत्राचार आदि के माधयम से मेधावी विद्यार्थियों से महाविद्यालय स्तर पर निरन्तर सम्पर्क रखा जाता है। संकल्प की ओर से कालेज विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूण्र आयोजन है - चार दिवसीय दिशादर्शन एवं व्यक्तित्व विकास शिविर। यह शिविर वर्ष में दो बार जुलाई एवं दिसम्बर में आयोजित किया जाता है। आई.आई.टी, मेडिकल, सी.ए., एम.बी.ए., स्नातकोत्तर कक्षाओं के मेधावी विद्यार्थियों को इसमें प्रवेश दिया जाता है। शिविर में सिविल सेवा परीक्षा से जुडे वैकल्पिक विषयों, सामान्य अधययन, निबंध आदि की तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन, नव चयनित अभ्यार्थियों से मिलकर तैयारी के क्रम में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा तथा उत्कृष्ट प्रशासकों व विषय विशेषज्ञों के संपर्क में आने का अवसर प्रदान किया जाता है।

वर्ष 1994 से संकल्प सिविल सेवा परीक्षा के लिए गंभीरता से प्रयासरत विद्यार्थियों को गैर व्यावसायिक आधार पर शिक्षण-प्रशिक्षण व मार्गदर्शन देने के कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। विस्तृत व गहन दिशा निर्देश, गैर-व्यावसायिक दृष्टिकोण जैसी कई विशेषताओं के कारण यह कोंचिंग कार्यक्रम विद्यार्थियों में काफी लोकप्रिय है। सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में उत्ताीर्ण हुए अभ्यार्थियों के लिए 20 दिवसीय साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है। साक्षात्कार कार्यक्रम में सेवानिवृत्ता वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। यह कार्यक्रम  विद्यार्थियों में बहुत लोकप्रिय है।

मूल्यबोध की दृष्टि से संकल्प का सबसे प्रमुख कार्यक्रम है दिशाबोध शिविर। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य उन युवाओं में, जो कि सिविल सेवा परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं, समाज के प्रति उनके दायित्वों का बोध कराना है। उन्हें इस पुण्यभूमि की संस्कृति से अवगत कराकर उनमें सामाजिक प्रतिबध्दता, राष्ट्रभक्ति, संवेदनशीलता, उत्कृटता व प्रामाणिकता जैसे गुणों का विकास करना है। संस्कारों से ही जुड़ा संकल्प का एक और कार्यक्रम है 'व्यास पूजा' का। इसमें ख्यातिप्राप्त एक शिक्षक और एक प्रशासक को सम्मानित किया जाता है। कुल मिलाकर कहें तो संकल्प से जुड़े लोग सिविल सेवा को भारतीय मूल्यों से संस्कारित करने की एक ईमानदार कोशिश कर रहे हैं। उनका यह प्रयास आने वाले समय में जरूर अपना असर दिखाएगा।

संपर्क : जनकल्याण शिक्षा समिति (पंजी.) दिल्ली, संकल्प भवन, आरामबाग, पहाड़गंज, नई दिल्ली-55

फोन - 011-23538231, 23522520

 राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन