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सहकार |
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भागीदारी से हल हुई पानी की समस्या |
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उर्वा अध्वर्यु |
गुजरात
के
सुप्रसिध्द लोक साहित्यकार स्वर्गीय झवेरचंद मेघाणी
ने आजादी के कुछ ही वर्ष पूर्व सौराष्ट्र की लोक
कथाओं में अनेक नदियों में आई बाढ़ का उल्लेख किया
है। आज वही सौराष्ट्र पिछले कुछ समय से अकाल ग्रस्त
और सूखा ग्रस्त क्षेत्र घोषित होने लगा है। आजादी के
50
वर्ष में ही गुजरात की छोटी-बड़ी
सभी नदियां सूख गईं और
कृषिषि प्रधान
गुजरात अब सूखाग्रस्त गुजरात बन गया। कभी
'सागर'
के नाम से प्रसिध्द माही
;सागरध्द
नदी सूखकर नाला हो गई है।
पिछले दस वर्षों में गुजरात में पानी
का संकट इतना बढ़ गया था कि लोगों को एक घड़ा पानी
लेने के लिए भी एक गांव से दूसरे गांव भटकना पड़ता
था। डेढ़-दो किलोमीटर दूर से साईकिल पर या टैंकर से
पानी लाना पड़ता था। कुएं का पानी भी
700-800 फुट अंदर चला गया और
काफी प्रदूषित भी हो चुका था,
परंतु इस
प्रदूषित पानी के लिए भी लोग मरने-मारने पर उतर आते
थे।
लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि
पिछले कुछ वर्षों की लोक भागीदारी,
कुछ सामाजिक संस्थाओं एवं सरकार
की कड़ी मेहनत के बाद आज सौराष्ट्र में गर्मी के मई
महीने में भी नदियां भरी रहती हैं। लोगों को
अपने-अपने घर में पीने का पानी मिल रहा है। खेतों
में उत्ताम प्रकार की फसल तीन बार उगाई जा सके,
ऐसी
सिंचाई व्यवस्था हो गई है।
गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के
धाराजी तहसील का सूपेड़ी गांव। पिछले
10 वर्षों से इस गांव के लोग
पीने के पानी के लिए आसपास के गांवों में भटकते रहते
थे। सूपेड़ी गांव के प्रफुफल्लभाई फलदू अपने गांव की
पानी की समस्या के बारे में बताते हैं, ''पिछले
वर्षों में हमारे गांव ने पानी का ऐसा संकट झेला है
कि आप कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। इससे निपटने के
लिए सरकार ने 'सरदार पटेल
जल संचय योजना' बनाई।
इसके तहत राज्य सरकार और स्थानीय जनता के सहयोग से
जल संरक्षण का कार्य किया जाने लगा। किन्तु जनजागरण
के अभाव में यह योजना अपेक्षित गति से नहीं चल पा
रही थी। हमारे गांव के अगुआ लोगों ने गांव के पास से
बहने वाली भादर नदी पर बड़े-बड़े चेकडैम बनाने के अनेक
प्रयत्न किए किन्तु सफलता प्राप्त नहीं हुई और
अन्तत: ये प्रयास छोड़ दिए गए।''
फिर सरकार ने
'सरदार
पटेल सहभागी जल संचय योजना'
को गति प्रदान करने के लिए पहले
जनजागरण किया। साथ ही जनता और सरकार के बीच समन्वय
स्थापित करने के लिए 'सौराष्ट्र
जलधारा
ट्रस्ट'
नामक स्वयंसेवी संगठन का सहयोग
लिया,
जो पूरे राज्य में चेक डैम के माधयम
से जल संक्षरण के कार्य के लिए सक्रिय है।
केवल चार दिनों में ही सरकार ने चेक
डैम बनाने की लिखित मंजूरी दे दी और देखते ही देखते
फरवरी,
2004 में भादर नदी पर तीन
बड़े-बड़े चेक डैम बनकर तैयार हो गए। लगभग 600
फुट चौडे ऌस चेक डैम की जल संचय
क्षमता 55 लाख क्यूबिक
फिट है। परिणामस्वरूप उस वर्ष बरसात में केवल
4.5 ईंच बारिश होने पर भी भादर
नदी 10 कि.मी. में बहने
लगी। बरसात में भी दो-चार दिन ही बहने वाली इस भादर
नदी में अब गर्मी के मौसम में भी नौका विहार का आनंद
उठाया जाता है। साथ ही भादर नदी के दोनों किनारों पर
बसे गांवों की लगभग 8 से
10 हजार बीघा जमीन को
परोक्ष सिंचाई का लाभ मिलने लगा है। भादर नदी को
लेकर बरसों पहले एक गुजराती फिल्म बनी थी - 'भादर
तारा वहेता पाणी'
(भादर
तेरे बहते पानी) जो यहां की एक सुप्रसिध्द लोक कथा
पर आधारित
थी। पिछले कुछ वर्षों के जल संकट को देखते हुए लगने
लगा था कि वह एक सुहाना सपना था जो बीत चुका है। अब
भादर में कभी पानी नहीं बहेगा। लेकिन ईश्वर की
कृपा,
सरकार और सौराष्ट्र जलधारा
ट्रस्ट के साथ-साथ ग्रामीणों के परिश्रम के फलस्वरूप
लोग फिर से गर्व के साथ कह सकते हैं-
'भादर
तारा वहेता पाणी।'
ऐसा ही एक और चमत्कार हुआ जूनागढ़
जिले के विसावदर तहसील के लूंधीया
गांव में। इस गांव के पास से बहने वाली और पिछले
20-22
बरसों से सूखी पड़ी सातलड़ी नदी पर
सरदार पटेल जल संचय योजना के अंतर्गत राज्य सरकार और
सौराष्ट्र जलधारा
ट्रस्ट के सहयोग तथा मार्गदर्शन से चार बड़े चेक डैम
बनाए गए। परिणामस्वरूप केवल
8
ईंच बारिश में ही इस नदी में
5 कि.मी. विस्तार में
पानी भर गया। इसके कारण गांव के आसपास के अनेक कुओं
में जल स्तर लगभग 50 फीट
उपर आ गया है। ग्राम पंचायत हस्तक के कुओं में भी जल
स्तर 70
फुट उपर आ गया और इन कुओं से पाईप
लाईन द्वारा आज गांव के प्रत्येक घर को पानी
पहुंचाया जा रहा है।
लूंधीया
गांव के विपिनभाई गजेरा तथा गांव के मुखिया
फरुषोत्तामभाई घाड़ीया अपने गांव की सुलझ चुकी
जल-समस्या के बारे में बताते हैं,
''राज्य सरकार और सौराष्ट्र जलधारा
ट्रस्ट के सहयोग के कारण अल्प समय में जिस प्रकार
हमारे गांव की समस्या सुलझ गई है,
हमें इसका बड़ा आश्चर्य है।
22 लाख रफपयों से बने चार
चेक डैम में 16 लाख
रफपयों का आर्थिक सहयोग राज्य सरकार का रहा।
सौराष्ट्र जल सेवा ट्रस्ट के निरंतर मार्गदर्शन एवं
प्रेरणा से 6
लाख रफपए का आर्थिक सहयोग गांव के लोगों ने दिया।
इससे पहले बरसात में भी अनेक कुऔं में मुश्किल से 15
से 20
फुट पानी ही आता था, जो
तीन महीनों में खत्म हो जाता था। किन्तु चेकडैम
बनने के बाद केवल 8 ईंच
बारिश में ही कुओं में जलस्तर 50
से 70
फफट उफपर आ गया और फुलस्वरूप पूरे वर्ष भर इन कुओं
से पानी मिलता रहा। स्वाभाविक रूप से हमारे गांव की
पेयजल समस्या तो सुलझ ही गई,
साथ ही सिंचाई की समस्या का भी
समाधान
हो गया है। सभी कुएं फिर से भर जाने के कारण लगभग
1200 एकड़ जमीन
में दो बार सिंचाई की व्यवस्था हो गई है।''
सूपेड़ी और लूंधीया
गांव में हुए जल संरक्षण के ऐसे चमत्कार राज्य के
सभी गांवों में हों,
इसके लिए
सौराष्ट्र सहित पूरे राज्य में सूख चुकी नदियों पर
बड़े-बड़े चेक डैम बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक
अभियान शुरू किया है।
सैकड़ों गांवों के आसपास के पर्यावरण
तथा कृषि क्षेत्र को कम चेक डैम के बावजूद भी
अधिकतर लाभ मिल सके,
इसके लिए वर्ष 2004
से राज्य सरकार ने सौराष्ट्र की
77 बड़ी नदियों पर बड़े-बड़े
चेक डैम बनाने का अभियान शुरू किया है। इस अभियान को
भी अभूतपूर्व सफलता मिली है। सौराष्ट्र जलधारा
ट्रस्ट के अलावा अम्बुजा सीमेन्ट फाउन्डेशन,
फील्ड मार्शल,
ओरपेट,
आगा खान ट्रस्ट,
जी.एन.एफ.सी. जैसे अनेक
स्वैच्छिक संगठन तथा अन्य उद्योग समूहों के सहयोग
से राज्य सरकार ने इन नदियों पर 100
से अधिक बड़े चेक डैम बनाए हैं।
नदियों के बहाव क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में
बारिश हो तो सामान्य परिस्थिति में बाढ़ आने के बाद
दो-तीन दिन में खाली हो जाने वाली ये सभी नदियां चेक
डैमों के कारण आने वाले दिनों में पूरे वर्ष भर पानी
से भरी दिखाई देती हैं। इन 60
बड़े चेक डैमों
में
लगभग
200 मिलियन घनमीटर पानी का संचय
होने से दोनों किनारों के आसपास के सैंकड़ों गांवों
के असंख्य कुएं फिर से भर गए हैं। इससे लगभग
30 हजार
एकड़ जमीन को सिंचाई का लाभ मिल रहा है।
बड़ी नदियों पर चेक डैम तैयार करने के
साथ-साथ राज्य सरकार ने गांव के लोगों के सहयोग से
गांव की सीमा पर भी छोटे चेक डैम बनाने का अभियान
चालू कर दिया है। सौराष्ट्र में तीन क्षेत्रों में
25
हजार से भी अधिक चेक डैम तैयार हो
चुके हैं।
इससे किसानों को सिंचाई की सुविधा
उपलब्धा हुई। इसी प्रकार राज्य सरकार के ग्राम विकास
विभाग द्वारा
'सुजलाम्
सुफलाम् योजना' के
अंतर्गत बड़ी संख्या में तालाबों का निर्माण किया
गया। जहां औसत बारिश केवल दस ईंच दर्ज की गई,
ऐसे
क्षेत्रों में ये तालाब देर से आने वाली बारिश की
परिस्थिति में वरदान साबित हो रहे हैं। अहमदाबाद
जिले के राणपुर तहसील के किनारे तथा गोघावट जैसे
अनेक गांवों में तालाबों के चमत्कारिक परिणाम देखने
को मिले हैं। इन गांवों में बारिश केवल आठ से तेरह
इंच होने के बावजूद किसानों को शत-प्रतिशत फसल लेने
का पूर्ण विश्वास है। |