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जनजागरण |
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आरा की भंडोल पार्टी के कारनामे |
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विनय कुमार सिंह |
राष्ट्रीय
स्वाभिमान आंदोलन के बैनर तले जब श्री के.एन.
गोविन्दाचार्य ने बिहार में अलख यात्र शुरू की तो
राजनीतिक समालोचकों को इसका औचित्य नहीं समझ में
आया। गोविन्दाचार्य ने जब अपने भाषणों में दलविहीन
राजनीति,
विकेन्द्रित राजनीति और
समानान्तर राजनैतिक आंदोलन की बात कही तो उसे कई
लोगों ने अव्यावहारिक मान कर खारिज कर दिया। लेकिन
बिहार में वर्ष 2007 में
हुए नगरपालिका चुनावों में आरा और सीवान के परिणामों
ने राजनीतिक विष्लेशकों को चौंका दिया। दो चरणो की
अपनी अलख यात्र के दौरान के.एन. गोविन्दाचार्य ने जो
संदेश दिया था, उसी के
साथ आरा और सीवान जिले के राष्ट्रीय स्वाभिमान
आंदोलन के कार्यकर्ता जनता के बीच गए। उनके मन में
वैकल्पिक राजनीति का एक जमीनी प्रयोग करने की दृढ़
इच्छाशक्ति थी। इसी के तहत उन्होंने अपने-अपने जिले
में मतदाता जागरण अभियान चलाया। कार्यकर्ताओं ने
चुनाव में जिन लोगों को समर्थन दिया,
उनके चुनाव लड़ने के तरीके,
मुद्दे और नारे अन्य उम्मीदवारों
से अलग थे। जिले के लोगों को यह नारा खूब पसंद आया,
'दल,
दलाल,
दौलत,
हथियार,
लोकतंत्र के दुश्मन चार।'
यहां मुद्दा बिजली और सड़क को नहीं बल्कि अन्न,
पानी,
हवा, भूख,
प्यास और स्वांस को बनाया गया।
चुनाव के दौरान एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी नहीं
लगाए गए।
चुनाव के नतीजे चौंकनें वाले रहे। कई सीटों पर
मतदाता जागरण अभियान का असर देखने को मिला। अधिाकांश
सीटों पर बाहुबली,
भ्रष्ट और पैसे वाले हारे और कई
सीटों पर आन्दोलन के कार्यकर्ताओं की जीत हुई। इससे
यह बात उभर कर सामने आती है कि आज भी सकारात्मक
मुद्दों के माधयम से आमजन का विश्वास जीता जा सकता
है। इस चुनाव में एक और नई बात यह थी कि जीतने के
बाद नगर पाषर्दों ने मतदाताओं से स्वयं का अभिवादन
नहीं करवाया बल्कि मतदाताओं के स्वागत-सम्मान में
खुद समारोह किया।
चुनावों में उलटफेर सिर्फ बाहुबली शहाबुद्दीन के
क्षेत्र सीवान में ही नहीं हुआ। इसी से मिलता जुलता
केछ प्रयास आरा में किया गया। वहां कार्यकत्ताओं
ने भंडोल पार्टी बनाई। उनका साफ-साफ उद्देश्य था उन
भ्रष्ट,
बाहुबली और माफियाओं को हराना जो
विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार बने थे। यहां
भी परिणाम चौंकाने वाले रहे और कई गलत लोग चुनाव जीत
नहीं सके। आरा में चुनाव के बाद जब अधयक्ष बनने की
बारी आई तो फिर पार्षदों की खरीद-फरोख्त चालू हो गई।
इसका विरोध करने के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन
के कार्यकर्ताओं ने एक नायाब तरीका निकाला। उन्होंने
रोज का पर्चा 'भितरीया
खुरखेल' निकालना शुरू
किया जिसमें शेयर बाजार की तरह प्रत्याशियों
की रोज ऊपर-नीचे होती कीमतों का वर्णन रहता था।
बहरहाल यहां के लोगो के बीच इन प्रयासों की खूब
चर्चा हुई। आने वाले समय में सीवान और आरा के
कार्यकर्ता वहां की राजनीति में और जबरदस्त
हस्तक्षेप करने के मूड में हैं। साथ ही उनके इस
अनूठे प्रयोग से अन्य जिलों के कार्यकर्ता भी पूरे
उत्साह में हैं। इससे लगता है कि बिहार में वैकल्पिक
राजनीति का एक नमूना जल्द ही लोगों के सामने होगा।
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