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भारत विकास संगम
2008 |
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गौसंरक्षण
की अनूठी मिसाल है गोधाम पथमेड़ा |
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पूनम राजपुरोहित |
गोधाम पथमेड़ा केवल गौशाला नहीं है,
बल्कि यह गौ आधारित
व्यवस्थाओं और नीतियों का सृजन केन्द्र बन कर उभरा
है। यह एक ऐसा सृजन केन्द्र है जहां भारतीयता और
भारतीय संस्कृति पर आधारित
सकारात्मक प्रयोग हो रहे हैं।
गौ संरक्षण के क्षेत्र में गोधाम
पथमेड़ा ने एक अनूठी मिशाल पेश की है। एक ऐसी मिसाल
जिसके समान कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। यह बात
अतिशयोक्ति पूर्ण लगेगी पर यह सत्य है। मीडिया,
सरकारी अधिकारियों समेत सभी गोभक्त
इस बात को जानते हैं। गोधाम पथमेड़ा में
1993
से लेकर
1999
तक ऐसी स्थिति आ गई कि एक लाख से ऊपर गायों को यहां
संरक्षण व सुरक्षा उपलब्ध करायी गयी।
2005
में
2
लाख
80
हजार गोवंश गोधाम पथमेड़ा से सीधो सेवा प्राप्त कर
रहे थे। एक समय ऐसा था जब लोगों ने गोपालन को लगभग
छोड़ ही दिया था। ऐसी हालत में स्वामी दत्तशरणानंद जी
महाराज ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने राजस्थान के
जालौर जिले में स्थित पथमेड़ा को अपना केन्द्र बनाया
और वहां के लोगों के सहयोग से गायों के संरक्षण की
मुहिम शुरू की। उनकी मुहिम अब वृहद रूप धारण कर चुकी
है। यह स्थान अब केवल गौशाला नहीं है,
बल्कि गौ आधारित व्यवस्थाओं और गौ
आधारित नीतियों का सृजन केन्द्र बन कर उभरा है। यह
एक ऐसा सृजन केन्द्र है जहां भारतीयता और भारतीय
संस्कृति पर आधारित सकारात्मक प्रयोग हो रहे हैं।
गाय से भारतीयता का मूल तत्व
सात्विकता का प्रादुर्भाव होता है। उसी गाय को बचाने
के लिए एक क्रियात्मक स्वरूप है गोधाम पथमेड़ा। यह
जानकर कई लोगों को आश्चर्य होगा कि एक ही स्थान पर
हजारों गायें हैं। सभी गायें स्वतंत्र है। स्वतंत्र
विचरण करती हैं।
24 घंटे दाना पानी और हर प्रकार
की दवा की यहां व्यवस्था है। गौ सुरक्षा के बाद यहां
गौ संरक्षण का आंदोलन खड़ा हो रहा है। राजस्थान ही
नहीं पूरे भारत वर्ष से लोग इस आंदोलन में हिस्सा ले
रहे हैं। अभी दिसम्बर में हुए नौवें राष्ट्रीय गौ
कल्याण महोत्सव में पांच दिनों में लाखों गोभक्त
पूरे देश से एकत्रित हुए,
जिनमें विचारक, चिंतक,
बुध्दिजीवी,
गो वैज्ञानिक और संत जन भी
पधारे। इस कार्यक्रम में गाय और गाय की उपादेयता,
महत्ताा और गाय द्वारा किस
प्रकार समाज मे परिवर्तन आ सकता है,
इन मसलों पर खास तौर पर बात हुई।
यह बहुत खुशी की बात है कि आज पथमेड़ा में 54
गोशालाएं हैं,
जो सीधो गोधाम
पथमेड़ा से संचालित होती हैं।
(प्रस्तुति
: छवि कौशिक)
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