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 फरवरी,  2008

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भारत विकास संगम 2008

चतुरी महतो का बलिदान हमें प्रेरित करता है

विनोद यादव (राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन)

बिहार प्रांत के वैशाली जिले के अंतर्गत एक गांव है मोदह। वहां के चतुरी महतो गौरक्षा के लिए अपने दो फत्रेंसमेत फांसी पर झूल गए। उनकी शौर्य गाथा को लोग भूल चुके थे। हमने जिले के लोगों को उस महाफरुष के बारे में फिर से बताया है।

भारत की धरती के कण-कण में महापुरुषों की कहानी छिपी हुयी है। उनके ऊपर विस्मृति की जो राख है, उसे बस हटाने की जरूरत है। हमारे जिले में ऐसे ही एक महाप्फरुष हुए हैं चतुरी महतो। गौरक्षा के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने वाले इस महापुरुष के बारे में जिले की कौन कहे, खुद उनके परिवार के लोग भी कम जानते थे। हमने उनके बारे में पता किया और लोगों को बताना शुरू किया। उनकी शौर्यगाथा मैं आप लोगों को भी बताना चाहता हूं।

बिहार प्रांत के वैशाली जिले के अंतर्गत एक गांव है जिसका नाम है मोदह। वहां चतुरी महतो का परिवार गौ रक्षा के लिए विशेष रूप से सक्रिय रहता था। 1928 में जब बकरीद के दिन गाय काटने की खुली घोषणा हुयी तो उनसे रहा न गया। उन्होंने कसाइयों से संघर्ष किया और दस गायों को कत्लखाने से मुक्त करा लिया। अंग्रेज सरकार ने रात में ही उन्हें गिरफ्रतार कर लिया। उनसे कहा गया कि अगर आप माफी मांग लें तो आपको रिहा कर दिया जाएगा। आप घोषणा करें कि मैं गोरक्षा आंदोलन नहीं चलाऊंगा। चतुरी महतो ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने घोषणा कर दी कि मुझे जो सजा मिलेगी स्वीकार है, लेकिन गाय के साथ विश्वासघात नहीं करूंगा। इसके जवाब में अंग्रेज सरकार ने उन्हें दंडित करने का मन बना लिया। कानूनी औपचारिकताओं के बाद उन्हें फांसी देने की घोषणा कर दी गयी। फिर भी चतुरी महतो विचलित नहीं हुए। बाद में एफ.आई.आर. करके वहां के एसपी मकबूल बट््ट ने उनके दो फत्रेंसमेत परिवार के नौ लोगों तथा उनके परिचित 56 और लोगों को गिरफ्रतार कर लिया। इसके बाद चतुरी महतो से कहा गया कि अगर आप माफी नहीं मांगते तो आपके पूरे परिवार को सजा हो सकती है। यह धमकी भी चतुरी महतो को डिगा नहीं पायी। उन्होंने घोषणा कर दी कि संपूर्ण परिवार हमारा बलिदान हो सकता है लेकिन हम माफी नहीं मांगेंगे। मुज्फ्फरपुर जिला अदालत ने उन्हें और उनके दो फत्रेंसौदागर महतो व रामेश्वर महतो को फांसी की सजा दी। उनके साथ 16 लोगों को आजीवन कारावास की सजा मिली।

कलकत्ताा हाइकोर्ट ने भी कहा कि अगर आप माफी नहीं मांगते तो फांसी की सजा बरकरार रहेगी। चतुरी महतो के परिजनों ने अपनी सारी संपत्ति दांव पर लगाकर तीस हजार रुपए देकर मोतीलाल नेहरू को प्रिवी काउंसिल में भेजा। वहां से राहत मिलने की बजाय और क्रूर नतीजा सामने आया। प्रिवी काउंसिल ने कहा कि पहले चतुरी महतो के छोटे फत्र को फांसी दी जाए, फिर भी अगर वे माफी न मांगें तो बड़े फत्र को फांसी दी जाए और अंतत: उन्हें भी फांसी पर चढ़ा दिया जाए। जब फांसी देने का दिन आया तो मुजफ्रफरफर सेंट्रल जेल को लोगों ने घेर लिया। आनन-फानन में उन्हें निकाल कर हजारीबाग सेंट्रल जेल भेजा गया। वहां फांसी से पहले अंग्रेजों ने उनसे कहा कि उनकी पत्नी, बेटी समेत घर के कई लोग आए हैं। आप किसी एक से मिल सकते हैं। इस पर उनका जवाब था कि अगर किसी एक से ही मिलना है तो फांसी पर चढ़ने से पूर्व मैं गौ माता का दर्शन करना चाहूंगा। हजारीबाग सैंट्रल जेल में आखिरी भोजन के रूप में गौदुग्ध का पान करते हुए और गौदर्शन करते हुए वे फांसी पर झूल गए। राष्ट्रय स्वाभिमान आंदोलन ने इस वर्ष गोपाष्मी के दिन उनके गांव में एक मेला लगाया। उनके शौर्य की गाथा को लोगों को सुनाने का ही परिणाम है कि पिछले दिनों 20 करोड़ का गोधन हरिहर क्षेत्र के सोनफर मेले से तस्करी में जाने से बचाया जा सका। उनके गांव में हम एक कीर्ति स्तंभ का भी निर्माण करवा रहे हैं। उस घटना में 56 लोगों को सजा मिली थी इसलिए इस गो रक्षा स्तंभ की ऊंचाई भी 56 फीट होगी। हम चाहते हैं कि इस स्तंभ के रूप में गोरक्षा में लगे लोगों को चतुरी महतो सदा प्रेरित करते रहें।

(प्रस्तुति : भारतीय पक्ष ब्यूरो)

 राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन