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अप्रैल,  2008

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नुक्कड़ नाटकों के जरिए बड़ा काम

भारतीय पक्ष ब्यूरो

आज भी मनोरंजन के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने का अहम कार्य नाटकों के जरिए किया जा रहा है। जनसंचार के इसी पारंपरिक पर बेहद सशक्त माधयम के जरिए सामाजिक जनजागरण फैलाने का कार्य 'मदारी आट्र्स' भी कर रही है। 

 

मंचीय कला का इतिहास काफी पुराना है। नाटकों को भी इसी के तहत शुमार किया जाता है। इनके प्रभाव और लोकप्रियता को लेकर किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए। मंच के अलाव नुक्कड़ नाटकों ने भी भारतीय समाज में एक अलग मुकाम बनाया है। भारत की आजादी की जंग जब लड़ी जा रही थी, उस वक्त भी लोगों के बीच अलख जगाने का काम नाटकों के जरिए किया जाता था। आज भी मनोरंजन के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने का अहम कार्य नाटकों के जरिए किया जा रहा है। जनसंचार के इसी पारंपरिक पर बेहद सशक्त माध्यम के जरिए सामाजिक जनजागरण फैलाने का कार्य 'मदारी आट्र्स' कर रही है। 

दरअसल, मदारी आर्ट्स लोक कलाकारों का एक समूह है। यह समूह नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों जैसे-बाल मजदूरी, बाल विवाह, दहेज प्रथा, मैला ढोने की प्रथा, छुआ-छूत के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही है। मदारी आर्ट्स के संचालक आनन्द कुमार गुप्त के मुताबिक वे लोग नुक्कड़ नाटक के माध्यम से केन्द्र शासन व राज्य शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, गरीबी उन्मूलन परियोजना, राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के साथ-साथ शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति, महिला सशक्तिकरण, पंचायती राज, सर्वशिक्षा अभियान, एड्स की जानकारी के साथ-साथ अन्य कई विषयों पर जनहित में जनचेतना का कार्य करती है। मदारी आर्ट्स के कलाकारों द्वारा पिछले दस वर्षों में छत्तीसगढ़ सहित पूरे भारत में लगभग 50 अलग-अलग विषयों पर दस हजार से ज्यादा नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन कर करोड़ो लोगो को अपना संदेश दिया जा चुका है। इस साल की शुरुआत में मिर्जापुर के चुनार में आयोजित भारत विकास संगम 2008 में भी मदारी आर्ट्स ने अपनी प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। यहां बौध्दिक सत्रें के बीच मनोरंजक ढंग से समाज से जुड़ी गंभीर बात लोगों तक पहुंचाने में मदारी आर्ट्स के साथी सफल रहे। कहना न होगा कि नुक्कड़ नाटक जनचेतना का सबसे सस्ता, सुंदर, ठोस एवं सशक्त माध्यम है। क्योंकि इसके जरिए दर्शकों से सीधे तौर पर संवाद स्थापित होता है। जबकि सैटेलाइट चैनल, होर्डिंग्स, पोस्टर, महंगे और कम प्रभावी हैं। आज ग्रामीण क्षेत्रें में जागरुकता की आवश्यकता है और इस दिशा में नुक्कड़ नाटक की भूमिका काफी अहम हो सकती है। ऐसा इसलिए कि नुक्कड़ नाटक न सिर्फ संप्रेषण का अच्छा माध्यम हैं बल्कि यह हमारी पुरानी परंपरा ये भी जुड़े हैं। इसका उपयोग राजतंत्र के समय भी संचार तंत्र के रूप में किया जाता था। बकौल आनन्द कुमार गुप्त, 'मदारी आर्ट्स भविष्य में एक लाख नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन कर देश-विदेश के कई करोड़ लोगों तक अपना संदेश देना चाहती है।'

मदारी आर्ट्स मंचीय नाटकों के माध्यम से साहित्यिक, ऐतिहासिक, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, सांस्कृतिक एवं अन्य विषयों पर लोगों के बीच जागरूकता फैलाती है। इसके अलावा मदारी आर्ट्स फीचर फिल्म, वृतचित्र, लघुफिल्म, धारावाहिक आदि का निर्माण भी करती है। भारत विकास संगम में आनन्द कुमार गुप्त ने कहा, 'सामाजिक मसलों पर देश के किसी भी हिस्से से लोग या कोई सामाजिक संगठन अगर नुक्कड़ नाटकों के जरिए अपने क्षेत्र में जागरूकता फैलाना चाहें तो मदारी आर्ट्स से संपर्क कर सकते हैं। हमें देश के अलग-अलग हिस्सों में अलख जगाने में खुशी होगी।'

संपर्क: शिवपुर, नमनाकला, अंबिकापुर सरगुजा, छत्तीसगढ़

 

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