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हलचल |
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हिन्दू संहति मंच
की घोषणा |
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उम्मेद सिंह बैद
'साधक' |
तपन घोष ने कोलकाता में गत
14 फरवरी को 'हिन्दू
संहति' मंच की घोषणा की। साहस,
शक्ति और सक्रियता के आदर्श पर चार सौ से अधिक
ध्येयनिष्ठ कार्यकर्तायों ने उनका साथ देना तय किया है। हिन्दू संहति का
जन्म सम्राट जैसे हिन्दुओं की व्यथा पर आंसू बहाने की बजाय किसी भी
प्रकार के अन्याय का वीरोचित प्रतिकार करने के उद्देश्य से हुआ है। यह
एक ऐसा मंच है जो आम हिन्दू की सुरक्षा,
उसके स्वाभिमान और अस्मिता के लिए बना है।
तपन घोष अध्ययन काल में प्रतिभा सम्पन्न छात्र रहे। वे संघ के
स्वयंसेवक बने और अध्ययन पूरा होते ही प्रचारक बन
गए। अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र होने के बावजूद उन्होंने अपने घर
की बजाए संपूर्ण हिन्दू समाज के हित के लिए काम करने का फैसला किया।
माता-पिता और बहनों का आग्रह इनकी तेजस्विता से हारा और हारता ही रहा।
प्रचारक के नाते विभिन्न दायित्व भी उनकी मौलिक तेजस्विता की कहानी बन
कर सामने आए। जिला प्रचारक,
फिर विद्यार्थी परिषद विभाग प्रचारक,
बजरंगदल और अन्त में विश्व हिन्दू परिषद में
उत्तरपूर्वांचल की घुसपैठिया समस्या से जुझते रहे। उन्होंने इक्कीस
वर्ष कार्य करने के बाद अनुभव किया कि बात बन नहीं रही है और मूल
कार्य पीछे ही छूटता जा रहा है। ऐसा अनुभव करने के बाद यह कहकर बाहर आ
गए कि आम हिन्दू के गुस्से को संगठन के व्यापक ढांचे तले दबाने का
अपराध नहीं करेंगे और अलग से कुछ सार्थक कार्य करेंगे।
तपन घोष ने अपने इसी निश्चय को साकार करते हुए कोलकाता में गत
14
फरवरी को 'हिन्दू संहति'
मंच की घोषणा की। साहस,
शक्ति और सक्रियता के आदर्श पर चार सौ से अधिक ध्येयनिष्ठ
कार्यकर्तायों ने उनका साथ देना तय किया है। इस मौके पर मंचस्थ लोगों
में गुजरात के डांग जिले में इसाईकरण की आंधी का रुख पलट देने वाले
योध्दा संयासी स्वामी असीमानंद, जय नगर
रामकृष्ण आश्रम के तेजस्वी संयासी पूज्य लोकानंद,
भारत सेवाश्रम संघ के कार्तिक महाराज और भारतीय
धारा के प्रासांगिक चिन्तक के.एन. गोविन्दाचार्य के युवा साथी विनय
कुमार सिंह प्रमुख रहे।
कार्यक्रम में दिल्ली से पधारे विनय कुमार सिंह ने गोविंदाचार्य का शुभ
संदेश पढ़ा। प्रयाग में गायत्री-साधना में लीन रहने के कारण वे स्वयं न
आ सके। संदेश पढ़ने के बाद अपने संक्षिप्त वक्तव्य में उन्होंने बताया
कि इस देश की जनता बार-बार ठगी जाती रही है। मुद्दे उठाए जाते हैं,
आन्दोलन चलते हैं और आन्दोलनों की परिणति सत्ता,
सम्पत्ति, सम्मान और
संगठन में हो जाती है, जबकि मुद्दे वहीं के
वहीं खड़े रहते हैं। इस खास मौके पर तपन घोष ने कहा कि मुझे अपने उन
पूर्वजों पर गर्व नहीं है जो बार-बार आक्रांताओ से पद-दलित होते रहे।
मुझे गर्व है उनपर जिन्होंने घास की रोटियां खाकर भी प्रतिकार किया,
स्वाभिमान की रक्षा की। मैं इतिहास के उन पृष्ठों
पर गर्व नहीं कर सकता, जिनमें हम बिना लड़े
ही परास्त और पराधीन हो गये, देश खण्डित
हुआ। मैं खण्डित मातृभूमि को पुन: अखण्ड बनाने हेतु अपने भाई-बंधुओं का
सोया स्वाभिमान जगाने की मंशा लेकर आया हूं। हिन्दुओं पर होते हर हमले
का प्रतिकार करूंगा। व्यक्तिगत मान-अपमान का क्या मोल है जबकि हमारी
मां ही लगातार अपमानों को झेल रही है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया
कि मेरा साथ देने का मन हो तो अपने आसपास चल रहे हर अन्याय का प्रतिकार
करो, मैं तुम्हारे साथ खड़ा हूं। माना कि
कानून तुम्हारे साथ नहीं है, माना कि भीड़
तुम्हारे साथ नहीं है, पर फिर भी अपनी आत्मा
की आवाज को मरने मत दो। भले ही हम राष्ट्रीय जीवन में कोई बड़ा बदलाव
ना कर पाएं, भले ही हम कोई बड़ा खेल नहीं खेल
पाएं, माना कि हम कैरम बोर्ड के खेल में
समूची गोटियों को खड्डे में नहीं डाल सके,
पर दो-चार गोटियों को खड्डे में डालने का संतोष तो अवश्य ही लेंगे।
संघ के वरिष्ठ प्रचारकों एवं अनेक पदाधिकारियों की उपस्थिति में आम
आदमी की पीड़ा मुखर थी। करीब चार घंटे तक चले अधिवेशन की समाप्ति घोषणा
के बाद भी ढाई-तीन सौ युवक सभागार में ही बैठे रहे। प्रत्येक अपने-अपने
गांव में वर्षों से चल रहे अन्याय को बताना चाहता था,
उसमें से राह बनाना चाह रहा था। तपन दा ने बंगाल
में चल रहे हिन्दू त्रस की बानगी स्वरूप तीन अलग-अलग परिवारों के
सदस्यों को मंच पर ला खड़ा किया। चौदह वर्षीय बालक सम्राट ने अपनार्
कुत्ता उतारकर उन घावों को दिखाया जो उसे जिन्दा जला देने के प्रयत्न
के साक्षी थे। उसके माता-पिता को सरकारी तंत्र और कानून व्यवस्था से
न्याय पाने की कोई उम्मीद नहीं है। कानून व्यवस्था के पहरेदारों ने तो
उल्टे आततायियों के साथ मिलकर उन्हें ही दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया
है। सम्राट की व्यथा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों के दिल दहला
दिए।
हिन्दू संहति का जन्म सम्राट जैसे हिन्दुओं की व्यथा पर आंसू बहाने की
बजाय किसी भी प्रकार के अन्याय का वीरोचित प्रतिकार करने के उद्देश्य
से हुआ है। यह एक ऐसा मंच है जो आम हिन्दू की सुरक्षा,
उसके स्वाभिमान और अस्मिता के लिए बना है। यह संगठन
अदम्य साहस लिए युवकों की शक्ति के बल पर सक्रिय हुआ है। इन युवकों के
मन में अपना सम्मान और स्वाभिमान बचाने के लिए अपना सब कुछ होम कर देने
का जज्बा है।
ईमेल: ummed_baid1@yahoo.co.in |