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अप्रैल,  2008

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बातचीत

गौ, गंगा और हिमालय की रक्षा हेतु हम जनजागरण करेंगे

श्री गोपाल मणि जी महाराज

गत 29 फरवरी को नई दिल्ली स्थित रामलीला मैदान में विशाल सन्त सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें मुख्य रूप से उन सन्तों एवं यात्रियों ने भाग लिया जिन्होंने गंगोत्री धाम से दिल्ली तक की पदयात्र की थी। उल्लेखनीय है कि यह पदयात्र 11 फरवरी को गंगोत्री धाम से शुरू होकर 28 फरवरी को दिल्ली पहुंची थी। 560 कि.मी. की इस पदयात्र का नेतृत्व श्री रामेश्वरी भक्ति आश्रम, उत्तरकाशी के संस्थापक श्री गोपाल मणि जी महाराज ने किया। भारतीय पक्ष के संवाददाता ने उनसे दिल्ली में सम्मेलन के पहले बातचीत की। प्रस्तुत है उस बातचीत के मुख्य अंश...

 

आपकी इस यात्र के क्या उद्देश्य हैं?

हम गौ, गंगा और हिमालय की रक्षा के लिए निकले हैं। आज ये तीनों खतरे में हैं। हमें यदि भारत की रक्षा करनी है तो इन तीनों की रक्षा बहुत जरूरी है।

आपका उद्देश्य अत्यंत व्यापक है। क्या आपने इस संदर्भ में कुछ करणीय बिंदु चिन्हित किए हैं?

हां। पहले तो हम चाहते हैं कि गौ के साथ देश में हिंसा बिल्कुल बंद होनी चाहिए।  सरकार को चाहिए कि वह गाय के गुणों के बारे में शोध करवाए। गाय तो गुणों की खान है। जब लोगों को मालूम होगा कि गाय इतनी गुणकारी है तो लोग वैसे ही उसके साथ हिंसा नहीं करेंगे।

दूसरा गंगा के बारे में एक अलग से नीति बने। गंगा हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति की पहचान रही है। उस पर व्यापक रूप से विचार मंथन होना चाहिए। गंगा में प्रदूषण रोकने का पक्का उपाय होना चाहिए। इस संबंध में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

गौ और गंगा की तरह हिमालय भी हमारे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिमालय में बेरोक-टोक आवाजाही से वहां प्रदूषण बढ़ रहा है, जिसके कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसे पर्यटन के लिए खोलना खतरनाक है। सैनिकों एवं तीर्थयात्रियों के अलावा अन्य लोगों के लिए हिमालय को प्रतिबंधित क्षेत्र बनाया जाना चाहिए।

 

यात्र के दौरान लोगों की कैसी प्रतिक्रिया देखने को मिली?

लोगों ने हर जगह हमारा स्वागत किया। गंगोत्री से दिल्ली तक की लंबी पैदल यात्र में शामिल होने के लिए लोग स्वैच्छिक रूप से आगे आए। गौ, गंगा और हिमालय की रक्षा के लिए सभी के मन में चिंता व्याप्त है। यही कारण है कि विभिन्न राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भी यात्र में हमारा सहयोग किया।

क्या आपकी यात्र के कारण केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार ने अपनी नीतियों में किसी प्रकार के परिवर्तन की घोषणा की है?

नहीं। अभी किसी सरकार ने इस तरह की कोई घोषणा नहीं की है।

 

आपकी यात्र पूरी हो चुकी है। इसके बाद आप क्या करेंगे?

हम वापस लोगों के बीच में जाएंगे। जगह-जगह समितियां बनाएंगे। लोगों को इकट्ठा करेंगे और सरकार पर दबाव बनाएंगे।

 

गंगा संरक्षण के बारे में देश भर में और कई लोग एवं संस्थाएं सक्रिय हैं। क्या आपका उनसे संपर्क है?

हां है। गंगा महासभा की ओर से भी गंगा संरक्षण के लिए यात्र निकाली जा रही है। वे लोग मुझसे मिलने आए थे। इस क्षेत्र में जो भी लोग काम कर रहे हैं, हम उनसे तालमेल बिठा के काम करेंगे।

 

 राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन