भारतीय मूल्यों पर आधारित वैकल्पिक व्यवस्था की पक्षधर हिन्दीं मासिक पत्रिका

अक्टूबर, 2007

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क्या यह संयोग है?

विजय आनन्द

बुद्ध और महावीर का भारत, अशोक और अकबर का भारत, सूर और तुलसी का भारत, महाराणा प्रताप, शिवाजी, रजिया, लक्ष्मीबाई, महात्मा गांधी, रविन्द्रनाथ टैगोर, सरदार पटेल का प्यारा 'भारत' इंडिया बन कर लोगों को भरमा रहा है। कभी सोने की चिड़िया कहलाने वाला यह आर्यावर्त भारत के नाम से जाना जाता रहा है। लोग आते रहे, जाते रहे, राजवंश बदलते रहे, किन्तु आर्यावर्त भारत का नाम नहीं बदला। हमारे देश में कई उतार-चढ़ाव आये, पर भारत-भारत ही बना रहा। तुगलकों और मुगलों के शासनकाल में भी यह भूभाग भारतवर्ष के नाम से रोशन रहा। 'भारतवर्ष' नाम ही अपने आप में महिमापूर्ण एवं गौरवशाली है। भारत अर्थात भक्तिभाव में लीन, (भा-भक्ति, रत-लीन) हमारी मूल भावना भी शुभ एवं पवित्र रही है- 'वसुधौव कुटुम्बकम्' और 'सर्वेभवन्तु सुखिन:, सर्वेसन्तु निरामया:। सर्वे भ्रद्राणि पश्यन्तु, माकश्चित् दु:खभाग् भवेत।' अर्थात सभी प्रसन्न रहें, सभी निरोग रहें और सबका भला हो, शुभ हो, कोई भी दुख का भागी, व्याधिग्रस्त और अभावग्रस्त न हो। मूलत: भारत आर्यावर्त है, और इसकी मिलीजुली संस्कृति निर्विवाद रूप से हजारों वर्ष पुरानी है। सभी भारतवासी आर्यपुत्र हैं, फिर चाहे वे किसी भी धर्म केों

दुर्भाग्यवश भारतवर्ष पर जब ब्रिटेन का कब्जा हुआ तो यहां पर सब कुछ पश्चिमी रंग-ढंग का हो गया। अंग्रेजों ने 'भारत' को इंडिया कहना शुरु कर दिया। जबकि भारत को भारत कहने में उच्चारण संबंधी कोई कठिनाई नहीं थी। आज विडम्बना यह है कि हम बडे गर्व से अंग्रेजी संस्कृति को अपनाए हुए हैं। देश में अब भी बहुत कुछ अंग्रेजी ढर्रे पर ही चल रहा है; बिना जांचे-परखे कि यह हमारे देश की परिस्थिति के अनुकू है या नहीं। भारतवर्ष का नाम इंडिया (INDIA) करना अनावश्यक था। रोमन में (BHARAT)  बिना किसी कठिनाई के लिखा और पढ़ा जा सकता है, किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि भारत के नैतिक मूल्यों, गरिमा, आन-बान और शान को देखकर द्वेषवश इसका मूल नाम तिरस्कृत किया गया। शब्दकोश में Indi वाले शब्दों पर गौर करें तो

INDICT  इंडिक्ट- अभियोग लगाना
INDIFFERENT  इंडिफरेंट  उदासीन
INDIGENCE इंडिजेंस गरीबी
NDIGENTI  इंडिजेंट- गरीब,   असहाय
INDIGESTION इंडाइजेशन- अपच
INDIGNITY इंडिग्निटी-  तिरस्कार
INDISCERNIBLE इंडिसर्निबल- धुंधाला
INDISCREET इंडिस्क्रीट नासमझीभरा
INDISCRIMINATELY इंडिस्क्रिमनेटली- अविवेकपूर्ण
INDISPOSED इंडिस्पोज्ड- अस्वस्थ
INDISPOSITION इंडिस्पोजिशन अस्वस्थता
INDISTINCT इंडिस्टिंक्ट धुंधाला
INDIGNANT इंडिग्नेंट रोषपूर्ण

धिकतर शब्द नकारात्मक प्रवृत्ति और दयनीय अवस्था को दर्शाते हैं। ऐसा निम्न शब्दों से सहज अनुमान लगाया जा सकता है:   

उपरोक्त शब्दों में प्रथम चार अक्षर INDI हैं और अंत में बस A लगाकर इंडिया शब्द बन गया। 'इंडिया' शब्द कहने में ही बड़ा अटपटा लगता है। संसार के लगभग सभी देशों के नाम रोमन में ही हैं, जो मूल नाम हैं, जैसे: जापान (JAPAN), अमेरिका (AMERICA), ्रां (FRANCE), पाकिस्तान  (PAKISTAN). नेपाल, (NEPAL) वहीं भारत का नाम बदलकर इंडिया किया गया, और हम सभी भारतवासी बिना किसी विरोध के खुशी से यही नाम अपनाए हुए हैं- इंडिया की बजाय (BHARAT) कहना-सुनना ज्यादा कर्णप्रिय लगता है। 'भारत' कहने से दिल में श्रद्धा और अदब का भाव उत्पन्न होता है। शायद इसीलिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने कहा था 'मेरा भारत महान'। भारत शब्द ही इस देश की प्राचीन परंपरा, संस्कृति और शुभ भावनाओं के अनुकूल है।

आज समय की जरूरत है कि हम सब भारतवासी अपने देश का नाम पुन: विश्व में 'भारत' के रुप में स्थापित एवं प्रतिष्ठित करें। हम सब की निर्विवाद रुप से यही प्राथमिकता होनी चाहिये। इस के लिए घर-घर अलख जगानी होगी और जन जागरण अभियान चलाने होंगे। मीडिया की इसमें सशक्त एवं प्रभावशाली भूमिका हो सकती है। संसद में इस आशय का प्रस्ताव एकमत से ध्वनित एवं पारित होना चाहिए। संसार के प्रत्येक देश में इंडिया की जगह 'भारतवर्ष' नाम दर्ज हो, जिससे 'भारतवर्ष' की प्राचीन परमपरा और संस्कृति की भीनी-भीनी खुशबू महकती रहे।

''जियें तो सदा उसी के लिए, यही अभियान रहे, यही हर्ष,

निछावर करदें हम सर्वस्व उसी पर, हमारा प्यारा भारतवर्ष''

संपर्क: 3/566, मालवीय नगर, जयपुर, राज.

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