|
कौन किसको प्रमोट कर रहा है?
अचानक ब्लाग्स प्रमोटरों की बाढ़ आ गयी है। मैं
किसी का नाम नहीं लूंगा। लेकिन,
इन प्रमोटरों के इरादे नेक हैं इसपर मन में कुछ
संदेह जरूर हो रहा है। बार-बार मन में एक सवाल
आने लगा है कि कौन किसको प्रमोट कर रहा है?
क्या ये ब्लाग प्रमोटर ब्लाग्स को प्रमोट कर रहे
हैं या फिर ब्लाग्स उनको प्रमोट कर रहे हैं?
मन में इस तरह के सवाल आने के कारण भी हैं। आजकल
जब भी मैं गूगल में किसी ब्लाग या विषय के
अनुसार देवनागरी लिपि में खोजबीन करता हूं तो
मुझे वह ब्लाग सीधा नहीं दिखता। मुझे वे ब्लाग्स
प्रमोटर दिखते हैं,
जहां उन ब्लाग्स के लिंक दर्ज हैं। मैं फिर कहता
हूं कि मैं किसी प्रमोटर का नाम नहीं लूंगा। आप
चाहें तो कोई भी सर्च करके परिणाम देख लीजिए।
जितने ब्लाग प्रमोटर हों उतना अच्छा। इसमें किसी
को क्या ऐतराज हो सकता है कि आपके ब्लाग्स को
दहाई,
सैकड़ा और हजार के स्तर पर जगह-जगह लिंक किया
जाए। और इन सभी लिंकों के माध्यम से आपके पास
पाठक आवें। तब तो नेकनीयती समझ में आती है और
लिक्खाड़ ब्लागरों को संतोष भी होगा कि इन लिंकों
के कारण पाठक मोरनी की भांति खिंचे चले आ रहे
हैं। लेकिन,
अभी तक ऐसा अनुभव आया
नहीं है। जिन दिनों हिन्दी ब्लाग्स और नारद जी
महराज ही होते थे,
हिन्दी ब्लाग्स के प्रमोशन
के लिए तब भी मेरा अनुभव है मेरे ब्लाग पर औसत
60-70 पाठक आते थे।
कभी-कभी सौ भी हो जाते थे। अब इतने सारे
एग्रीगेटर हैं। ढेर सारे प्रमोटर हैं। लगभग हर
जगह अपनी मौजूदगी है। फिर भी,
पाठकों की संख्या में कोई
खास बढ़ोत्तरी
दिखाई नहीं देती। तब भला हम कैसे मान लें कि ये
प्रमोटर ब्लाग्स को प्रमोट कर रहे हैं?
उल्टे यह जरूर हो गया है कि
अब अपने ही ब्लाग्स तक पहुंचने के लिए हमें उन
प्रमोटरों के पन्नों से गुजर कर आना होता है।
अगर हमने सर्च इंजन को अपना जरिया बनाया तो। और
क्या गारंटी है कि एक बार किसी और साईट पर चले
गये तो आपको याद ही रहे कि आप क्या खोजने आये
थे। इंटरनेट तो ऐसी दुनिया है कि यहां जो कोई भी
खोजने निकलता है वह खोजते-खोजते खो जाता है। फिर
बेचारे ब्लागर को क्या मिला?
प्रमोटरों ने पाठक दिये नहीं
और सर्च इंजन की संभावना भी अपने नाम कर ली। फिर
एक आम ब्लागर जो उन तकनीकों से वाकिफ नहीं है जो
अपने प्रमोशन के लिए इस्तेमाल की जाती हैं,
उसके स्वतंत्र अस्तित्व के
रास्ते क्या होंगे?
और फिर अभी यह छोटे खिलाड़ियों द्वारा खेला जा
रहा खेल है। अगर किसी दिन बड़े व्यवसायी की नजर
इन संभावनाओं पर पड़ गयी,
तब?
उसकी एक झलक मुझे तब मिली जब
एक ब्लाग प्रमोटर ने मेरे दो ब्लाग्स को बिना
पूछे अपनी लिस्ट में जोड़ लिया। फिर जब मैंने उस
ब्लाग को सर्च इंजन से सर्च किया तो पहले दो नाम
उन प्रमोटर महोदय के नाम अर्पित है। यानी हमारे
लेखन पर उनका प्रमोशन भारी पड़ गया। मुझे तो झटका
लगा है। थोड़ा आगे की सोचता हूं इसलिए धुंधला
भविष्य भी दिखता है कि हिन्दी के ब्लागर बड़ी
व्यावसायिक मछलियों के निवाले बन जाएंगे। उनके
हाथ कुछ नहीं आयेगा और प्रमोटर बिना कुछ किये
मजे करेंगे। पाठक वहां जाएंगे। और वहां जाने के
बाद आपके ब्लाग पर आयेंगे ही इसकी कोई गारंटी
नहीं तो इस तरह से आपके लिखे लेख पर उस प्रमोटर
को एक पाठक मिल गया। क्योंकि,
उसने अपने ताकतवर उपकरणों और
तकनीकी का उपयोग कर पाठक को अपनी ओर आकर्षित कर
लिया है। इस विषय पर मैं फिर लिखूंगा। मुझे लगने
लगा है कि ये प्रमोटर ब्लागरों को प्रमोट करने
की बजाय ब्लागर ही इनको प्रमोट कर रहे हैं। और
हम सब मिलकर गूगल को प्रमोट कर रहे हैं। अभी
इतना ही, ज्यादा लंबा
हो रहा है, फिर इस
विषय पर बात करेंगे।
|