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सेज : भूमि अधिग्रहण का नवीनतम
उपकरण |
पिछले कई दशकों से भूमि अधिग्रहण और
विस्थापन का जो सिलसिला चल रहा था,
उसमें 'सेज'
एक नवीनतम
कड़ी है। सेज के नाम पर पूरे देश में लाखों एकड़ जमीन
किसानों से हड़पने की योजना है। ये जमीनें किसी
सार्वजनिक हित के लिए नहीं बल्कि अमीरों की जागीर
बनाने के लिए ली जा रही हैं। पेश है बानगी के तौर पर
कुछ प्रस्तावित सेज परियोजनाओं की कहानी।
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1.
झज्जर-गुड़गांव (हरियाणा) का
रिलांयस एच.एस.आई.आई.डी.सी.सेज |
हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने
हरियाणा सोशल इकोनामिक जोन एक्ट पारित करके देश में
सबसे पहले और शायद सबसे बडे सेज के लिए लगभग
25,000 एकड़ का
सेज बनाने का रास्ता साफ कर दिया। दिल्ली-जयपुर
हाइवे पर बनने वाले इस सेज के 90-10
की हिस्सेदारी अनुपात में
रिलायंस इण्डस्ट्रीज लि. और हरियाणा स्टेट
इण्डस्ट्रीयल एण्ड इंप्रफास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
कार्पोरेशन द्वारा संयुक्त रूप से बनाया जा रहा है।
रिलांयस ने दावा किया है कि यह सेज सिंगापुर या दुबई
जैसा होगा। अभी तक कम्पनी कुल 4,000
एकड़ जमीन ही खरीद पायी है जिसे
अधिकांश कर्जदार किसानों ने बेचा है। अभी
21,000 एकड़ जमीन और खरीदनी है।
परन्तु, किसानों ने अब
जमीन बेचनी बन्द कर दी है। कम्पनी के दलाल किसानों
के बीच में तरह-तरह की अफवाहें फैला रहे हैं और उनके
साथ झूठे वायदे कर रहे हैं। रिलायंस कम्पनी ने झज्जर,
बहादुरगढ़
और गुड़गांव में जमीन खरीदने हेतु दफ्तर खोल रखे हैं।
दादरी सेज इस बात का पुख्ता उदाहरण
है कि किस तरह सेज नीति का लाभ बड़ी कम्पनियों को
दिया जा रहा है। रिलायंस कम्पनी किसानों को
150 रु. प्रति
वर्गमीटर की दर से मुआवजा देने की बात कर रही है। यह
दर पहले 75 रु. प्रति
वर्ग मीटर तय की गयी थी जो विरोध के बाद बढ़ाई गयी।
गौरतलब है कि 22 फरवरी
2004 को परियोजना का
उद्धाटन करते हुए उ.प्र. के मुख्यमंत्री ने घोषणा की
थी कि वे किसानों को 350
रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा देंगे। वैसे
इसी क्षेत्र में जमीन के बाजार भाव करीब
13,500
रुपये प्रति वर्ग मीटर चल रहे हैं।
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नंदीग्राम (हल्दिया)
का सेज |
हल्दिया पश्चिमी बंगाल की औद्योगिक
उपलब्धियों का प्रतीक है। वहां इंडियन आयल
कार्पोरेशन,
एक्साइड,
शा वालेस,
टाटा कैमीकल्स और हिन्दुस्तान
लीवर के कारखाने हैं। हल्दिया पेट्रो कैमीकल्स की
तमाम सहायक इकाइयां यहीं हैं। पश्चिमी बंगाल सरकार
ने इण्डोनेशिया के सलीम ग्रुप से हल्दिया में एक सेज
स्थापित करने का समझौता किया है। इसे पेट्रोकैमीकल्स,
कैमीकल्स एवं पेट्रोलियम की
कम्पनियों का सेंटर बनाने के लिए खोला जा रहा
है। सलीम ग्रुप का मल्टी प्राडक्ट सेज नंदीग्राम एवं
अन्य गांवों की लगभग 10,000
एकड़ जमीन पर बनेगा।
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महिन्द्रा
वर्ल्ड सिटी सेज-कांचीपुरम |
यह तमिलनाऊ स्टेट इण्डस्ट्रीयल
डेवलपमेंट कार्पोरेशन और महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा
का संयुक्त उपक्रम है। इसे कांचीपुरम जिले के
चेंगलपेट में सिंगापेरूमालकोविल में बनाया जाना है।
वर्ल्ड सिटी सेज उपजाऊ कृषि जमीन पर बनाने की योजना
है। यह स्थान चारों तरफ से छोटी पहाड़ियों से घिरा
है। महिन्द्रा गु्रप और तमिलनाऊ सरकार ने मिलकर वहां
किसानों से
2500 एकड़ जमीन अधिग्रहित की है।
इसमें 600 एकड़ उपजाऊ जमीन
है। इस योजना से 4,000
कृषक परिवार विस्थापित हुए हैं। कम्पनी ने किसानों
से 2002
में ही जमीनें खरीदना शुरू कर दिया
था। ज्यादातर किसानों को कम्पनी के गुण्डों ने धमका
कर उन्हें जमीन बेचने पर मजबूर कर दिया। यहां की
जमीन में पानी की अच्छी उपलब्धता है। अब यह भूजल
महिन्द्रा वर्ल्ड सिटी बनाने के लिए भरपूर मात्रा
में प्रयोग किया जा रहा है। इस कारण इलाके में भूजल
स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है।
1995
में ही
टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी ने उड़ीसा सरकार के साथ
स्टील प्लांट लगाने का समझौता किया था। इस प्लांट के
लिए छतरपुर-बेहरामपुर तहसीलों के
25
गांव
और गंजम जिला के सरोडा ब्लाक में पिपलपांका रिजर्व
फारेस्ट के
12
गांवों
की जमीन ली जानी है। इन जमीनों पर गोपालपुर स्टील
प्लांट को पानी सप्लाई करने के लिए रूसीकुलिया नदी
पर एक बांध भी बनेगा। इस सबके लिए इन गांवों की
5000
एकड़
जमीन ली जा रही है। इसके अलावा
1000
एकड़
जमीन और अधिग्रहित की जा रही है,
जहां
कम्पनी के कर्मचारियों की कालोनियां बनेंगी। इस जमीन
पर बसे लगभग
25,000
लोगों
का क्या भविष्य होगा,
इसके
लिए कोई योजना नहीं बनी है। यह पूरा इलाका हरा-भरा
समुद्री किनारे का इलाका है। जहां नारियल,
केला,
आम
काजू,
अनानास,
खजूर,
बेर,
अमरूद,
पपीता,
लक्ष्मण और सीताफल,
हल्दी,
नींबू
गन्ना जैसी कीमती फसलें होती हैं। स्थानीय निवासियों
को साल दर साल विधिध खाद्य सामग्री यहां की जमीनें
उपलब्ध करा रही हैं। यहां केवड़ा पैदा होता है,
जो
कीमती खुशबूदार रस देता है। इस प्रकार विभिन्न फसलों
से स्थानीय लोगों को लगभग
64
करोड़ रुपये की सालाना आमदनी होती है।
इसके मुकाबले टिस्को प्लांट स्थानीय लोगों को कुछ भी
नहीं देने वाला है। |