भारतीय मूल्यों पर आधारित वैकल्पिक व्यवस्था की पक्षधर हिन्दी मासिक पत्रिका भारतीय मूल्यों पर आधारित वैकल्पिक व्यवस्था की पक्षधर हिन्दीं मासिक पत्रिका

नवम्बर,  2007

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पुस्तक परिचय

  मनुस्मृति की आधुनिक व्याख्या
  पुस्तक :     मनुस्मृति हिन्दी
  लेखक :   डा एम. रामा जोयिस
  प्रकाशक : अक्षर प्रभात प्रकाशन, भोपाल, मध्य प्रदेश
मूल्य  :  80 रुपये

मनुस्मृति जन्म से मृत्यु तक का व्यावहारिक सिद्धांत बताने वाली एक प्राचीन पुस्तक है। इसमें संपूर्ण मानवता के हित की बात की गई है। यह बताने के लिए पंजाब हरियाणा के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री रामा जोयिस ने मनुस्मृति पर एक टीका लिखी है। हिंदी में उपलब्ध इस पुस्तक में बताया गया है कि मनुस्मृति कोई धार्मिक कर्मकांड का ग्रंथ नहीं है। यह मनुष्य को सांसारिक व्यवहारिता बताने वाला उपयोगी ग्रंथ है। क्योंकि, इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि धर्म का अर्थ है करणीय कर्म अर्थात व्यक्ति की जीवन शैली कैसी हो, उसके लिये कौन से कर्तव्य व क्रियाएं अभीष्ट हैं इत्यादि। पुस्तक आज के परिप्रेक्ष्य में धर्म के सुन्दर चित्रण को उत्तम एवं पारदर्शी तथा सुबोध व सरल तरीके से प्रस्तुत करती है। लेखक ने समय की आवश्यकतानुसार ग्रंथ की रचना की है। आशा है कि यह पुस्तक धार्मिक अनिश्चितताओं एवं कुंठाओं के निवारण में सहयोग देगी।

बुंदेलखंड की प्रतिनिधि पुस्तक
पुस्तक : रंग दस्तावेज
लेखक : डॉ परशुराम शुक्ल विरही
प्रकाशक : हिन्दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल, मध्य प्रदेश
मूल्य   :  

 45 रुपए

प्राचीनकाल में बुंदेलखंड का नाम चेदि, जनपद युग में दशार्ण तथा मौर्यकाल से चंदेल काल तक जैजाक भुक्ति अथवा जुझौति था। इस तरह की कई रोचक जानकारी को समेटे, इस पुस्तक में बुंदेलखंड के इतिहास एवं वर्तमान स्थिति की व्याख्या की गई है। इसमें परम्परा, लोक विश्वास, लोक कलाएं, लोक भाषा एवं साहित्य, पर्व, उत्सव, धार्मिक-सामाजिक सक्रियता, अंधविश्वासों के साथ ही बुंदेलखंड की राजनीति एवं शिक्षा पर भी जानकारी दी गई है। सौ पृष्ठों की इस पुस्तक में बुंदेलखंड की संस्कृति का पूरा परिचय मिल जाता है। सहज और सरल भाषा में लिखी इस पुस्तक में घटनाओं और तथ्यों को प्रमाणित करने के लिए संदर्भ तथा किताबों का विवरण भी यथा स्थान दिया गया है। इतिहास, संस्कृति लोकजीवन और लोकपरंपराओं में रुचि रखने वाले तथा शोधकार्य में जुटे शोधार्थियों के लिए यह एक अनिवार्य किताब है। (वन्या संदर्भ)

जनजातिय समाज को बयान करती कहानियां
पुस्तक :   घाघरी औढ़नी
लेखक :  शिवकुमार पाण्ड़
प्रकाशक : राष्ट्रीय प्रकाशन, भोपाल, मध्य प्रदेश
मूल्य : 90 रुपये 

   

 

 

नजातीय समाज की परम्पराएं कहीं तो समय से बहुत आगे हैं और कहीं एकदम पिछड़ी हुई हैं। इनकी इन्हीं परम्परराओं को कहानी के रूप में श्री शिवकुमार पांडेय ने गुंथा है। मध्यप्रदेश में बसने वाली जनजातियों की पृष्ठभूमि कहानियों में है। भील, सहरिया, बैगा जनजाति की परम्पराओं को आधार बनाकर कहानियां लिखी गई हैं तो आदिवासी बहुल जिला खरगौन एवं बैतूल में प्रचलित विश्वासों को भी कथा के लिए चुना गया है। 120 पृष्ठों की इस किताब घाघरी ओढ़नी में ग्यारह कहानियां सम्मिलित हैं। यह कहानी संग्रह समय के साथ चलती है, क्योंकि इसमें जनजातीय समाज की प्रथाएं, परम्पराएं सामयिक बनी हुई हैं। घाघरी ओढ़नी की हर कहानी आधुनिक समाज को भी उद्वेलित करती है। जनजातीय समाज की परम्पराएं उस दुनिया में ले जाती हैं जो आज राकेट युग में केवल किताबों तक सिमटी जान पड़ती हैं। घाघरी ओढ़नी की कहानियां बताती हैं कि आज के समय में भी जनजातीय समाज की आदिम परम्पराएं जीवित हैं। जनजातीय समाज के बारे में अनजान या थोड़ी-बहुत जानकारी रखने वालों को यह कहानी संग्रह प्रामाणिक तथ्य एवं जानकारी देता है, तो जनजातीय समाज में रुचि रखने वालों के लिए यह संदर्भ ग्रंथ की तरह है।

यह सत्य है कि बहुत भारी-भरकम शब्दों में चीजों को प्रस्तुत किया जाए तो उनका प्रभाव कम हो जाता है, किन्तु वही चीजें सहज रूप में प्रस्तुत की जाएं तो उनका प्रभाव ज्यादा होता है। टेलीविजन के इस दौर में जब हिन्दी और अंग्रेजी का घालमेल हो रहा है, ऐसे में कहानीकार ने प्रचलित अंग्रेजी शब्दों का भी प्रयोग किया है। जैसे स्नानघर के स्थान पर बाथरूम शब्द का उपयोग हुआ है। लेकिन ऐसा करने से कहानी की भाषा बोलचाल की भाषा बन गयी है। ऐसा करना कहानी संग्रह को पठनीय बनाने के लिए शायद आवश्यक भी था। निश्चित रूप से कहानी संग्रह अपने आप में एक नया अनुभव है। (वन्या संदर्भ)

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