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नवम्बर,  2007

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श्री खेतेश्वर गोसेवाश्रम खिरोडी में स्वामी दत्तशरणानंद का चातुर्मास प्रवास

 पूनम राजपुरोहित

 श्री खेतेश्वर गोसेवाश्रम खिरोडी में परम श्रद्धेय स्वामी श्रीदत्ताशरणानंदजी महाराज का चातुर्मास बहुपक्षीय सकारात्मक सोच एवं बहुउद्देशीय सृजनात्मक प्रवृत्तियों का पोषक सिद्ध हुआ है। श्रध्देय स्वामी जी श्रीदत्ताशरणानंदजी महाराज के चातुर्मास समापन सामारोह को देखने एवं सुनने के लिए 24 सितंबर को खिरोडी ही नहीं बल्कि आसपास के 50 किमी क्षेत्र के गांवो से हजारों नर-नारी आए थे।

श्रद्धेय स्वामीजी के सार्वभौमिक प्रवचनों एवं शिक्षाओं से प्रेरित होकर स्वतंत्र रूप से चौहान पट्टी एवं मालाणी पट्टी के पुरोहित समाज ने सामाजिक बुराइयों-कुरीतियों को मिटाने का सामूहिक संकल्प लिया। चातुर्मास के दौरान 10 हजार से ज्यादा पेड़-पौधों को लगाकर तारबंदी की गई। साथ ही पुराने लगे हजारों पौधों को भी संरक्षण व सुरक्षा प्रदान की गई। पंचायत की आम सहमति से सैकड़ों बीघा गोचर भूमि को सुरक्षित बना कर हुआ यह कार्य अगले दस वर्षों में एक अनूठा उदाहरण बन जायेगा। मात्र दो माह में खिरोडी में जितना कार्य हो चुका है, उसकी कहीं कोई मिसाल नहीं मिलती। आने वाले दस वर्षों में यहां जो प्राकृतिक छटा बिखरेगी, उसे सोचकर ही हवा का सुखद झोंका सा महसूस होता है।

गोपालन को घर-घर बढ़ाने  के लिए श्री खेतेश्वर गोसेवाश्रम खिरोडी में थारपारकर नस्ल की नंदीशाला का शुभारम्भ किया गया। खिरोड़ी गोसेवाश्रम में 10 हजार ली. प्रतिदिन का 'गोदुग्ध अवशीतलन संग्रह केन्द्र' शुरू करने की तैयारियों ने आसपास के गांवों में गोपालन की दिशा में नव स्फुर्ति जागृत कर दी है। परम श्रद्धेय स्वामीजी की प्रेरणा से इस कार्य को संभालने वाले कार्यकर्ताओं ने गाय का दूध भैंस के दूध  की तुलना में तीन से चार रूपये महंगा बेचने का निर्णय लिया है। इससे गोक्रांति के आन्दोलन में अभूतपूर्व गति आएगी। उल्लेखनीय है कि गोधाम पथमेड़ा में पहले से ही ऐसा हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप देश भर में गोभक्तों को प्रमाणिक गोघृत मिलता है।

यह भी निर्णय लिया गया कि 'श्री गो गोचर ग्राम विकास समिति' गोचरों की रक्षा एवं विकास करेगी। 'श्री खेतेश्वर गोसेवा मण्डल' में 50 से 60 वर्ष तक के गोभक्त, कल्याण निधि का संग्रह एवं विभिन्न कार्यों एवं योजनाओं को  क्रियान्वित करेंगे। 'गो कृषि उत्पाद परिषद्' में 20 से 50 वर्ष के आयुवधि के युवा, जैविक खेती को प्रोत्साहन देंगे। 'विश्वकर्मा नंदी गो-गृह निर्माण समिति' क्षेत्र में थारपारकर नस्ल के अच्छे नंदी एवं बछड़ियों का विकास करेगी। इससे आर्थिक क्रांति एवं गोसुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

'सुरभि सत्संस्कार समिति' की ओर से सत्संग, धर्म व अध्यात्म के रूप में सद्विचारों को बल देने वाले कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 'श्री आशापुरा मातृ ममत्व शक्ति सेवा समिति' के माध्यम से मातृशक्ति स्वयं तथा भावी पीढ़ीयों को पौराणिक व पारम्परिक मर्यादाओं के पालन हेतु प्रेरित करेगी तथा नारी जाति के सामने वर्तमान में आयी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता का विकास करेगी। इस प्रकार नारी सम्मान, बालिका शिक्षा और गृह स्वावलम्बन को तो बल मिलेगा ही, साथ ही सामाजिक कुरीतियों एवं बुराईयों के विरुद्ध भी व्यावहारिक ढंग से एक सामाजिक आंदोलन का सूत्रपात होगा। इस प्रकार स्वामी दत्त शरणानंद जी के चातुर्मास कार्यक्रम ने खिरोडी में एक क्रांति का सूत्रपात कर दिया है। उन्होंने समाज को जाग्रत करके उसे उसकी शक्ति से अवगत कराया है। निश्चित रूप से भारत के अन्य क्षेत्रों के लिए खिरोडी ने एक आदर्श प्रस्तुत किया है।

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विदेशी संस्थाओं एवं सरकारों से संधि करने की शक्ति संसद को सौंपने की मांग

पिछले दिनों सरकार की संधि करने की शक्ति पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। 'नेशनल वर्किंग ग्रुप आन पेटेंट लॉज' की ओर से आयोजित इस सेमिनार में  पूर्व प्रधानमंत्री श्री आई के गुजराल, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री जे.एस वर्मा, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री मुरली मनोहर जोशी सहित कई महत्वपूर्ण लोगों ने भाग लिया। सेमिनार में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए सरकार से मांग की गई कि वह संसद में एक कानून ले आए जिससे यह सुनिश्चित हो कि सरकार बिना संसद की मंजूरी लिए विदेशी संस्थाओं एवं सरकारों से किसी प्रकार की संधि न कर सके। अमेरिका से हुए परमाणु समझौते को राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध बताते हुए वक्ताओं ने मांग की कि सरकार यदि संसद का सम्मान करती है तो वह इसे संसद में पेश करे। प्रस्तावित विधेयक में यह प्रावधान भी किया जाना चाहिए कि संसद के समक्ष प्रस्तुत किसी संधि से यदि भारत के किसी राज्य के हित जुड़े हैं तो ऐसे मामलों में संबंधित राज्य सरकारों की राय भी ली जाए। सेमिनार में सभी राजनीतिक दलों से अपील की गई कि यदि सरकार इस प्रकार का कोई विधेयक नहीं लाती है तो निजी विधेयक के जरिए इस प्रकार का कानून बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

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