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नवम्बर,  2007

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अब होगी खलनायकों की पूजा

अक्षय जैन

 

सौ करोड़ की आबादी वाले एक निर्धन देश में कल्पनातीत और विरल दृश्य देखने को मिल रहे हैं। अब कोई यह नहीं कह सकता कि संसार के सबसे बड़े लोकतंत्र का अपना कोई राष्ट्रीय हीरो नहीं है। जो देश कर्ज में डूबा हो और जहां सारी व्यवस्थाएं चरमरा गई हों, वहां नये नायक का अवतरित होना बहुत मायने रखता है। घर का रखवाला न हो तो घर किस काम का?

आजकल हमारे राष्ट्रीय हीरो संजय दत्ता हैं। बहुत सारे लोग उन्हें संजू बाबा के नाम से पुकारते हैं। मुझे यह संबोधन जरा भी पसन्द नहीं। अरे जिस शख्स की उम्र अड़तालीस साल की हो गई, उसमें अभी भी लोग बचपना और नादानी ढूंढ रहे हैं। माना कि बच्चों के सौ गुनाह माफ होते हैं लेकिन अदालतें बड़ी बेरहम होती हैं। मासूमियत और पाकीजगी आप किसी पर थोप नहीं सकते।

संजय दत्त के चाहने वाले और प्रशंसक तो इस देश में अनादि काल से थे, लेकिन अदालत के ताजा फौसले ने उन्हें शिखर पर बिठा दिया। शोहरत के मामले में उन्होंने अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर को मीलों पीछे छोड़ दिया है। अगर एक बार फिर से रायशुमारी करवाई जाये, तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि संजू बाबा जेल में रहकर राष्ट्रपति का चुनाव जीत सकते हैं। आखिर जो शख्स इस देश के लोगों को गांधीगिरी के रास्ते पर चलने के लिए उकसा रहा हो, उसे उसका वाजिब हक तो मिलना ही चाहिए।

कांग्रेस के बड़े नेता और ताकतवर केन्द्रीय मंत्री का बयान आया है कि संजय दत्त एक सच्चे देशभक्त हैं। मुझे यह समझ में नहीं आया कि मंत्री महोदय को ऐसा बयान देने की जरूरत क्यों पड़ी? हकीकत तो यह है कि इस देश की जनता से कुछ भी छिपा हुआ नहीं है। यह पब्लिक है, सब जानती है। संजू बाबा को बिना मांगे ही देशभक्ति का सर्टिफिकेट मिल गया। कांग्रेसियों की यही तो खासियत है। वे अपने लोगों को जब भी देते हैं, छप्पर फाड़ कर देते हैं।

सिगरेट छोड़ना बहुत आसान है! मैं कई बार छोड़ चुका हूं। यह बात किसी दार्शनिक ने कही थी। मेरा माना है कि देशभक्त बनना भी बहुत आसान है। सुबह का अखबार पढ़ते समय अगर आप यह तय कर लें कि आपको देशभक्त बनना है तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको अपने इरादे से नहीं डिगा सकती। अमेरिका भी नहीं।

भारतीय क्रिकेट टीम जब वर्ल्ड कप खेलने गई थी, तो देश में अद्भुत और रोमांचक दृश्य देखने को मिले थे। हवन चल रहे थे, आरतियां उतारी जा रही थीं, लोग उपवास पर बैठे थे। लेकिन ईश्वर ने हमारी एक नहीं सुनी। इतिहास फिर से दोहराया जा रहा है। लोग ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि संजू बाबा की सजा खत्म कर दी जाए या कम कर दी जाये। कुछ लोगों ने यह पेशकश भी की है कि वे संजय दत्त की जगह जेल भुगतने को तैयार हैं। यरवदा जेल के बाहर संजय दत्त को देखने उमड़ी भीड़ ने पुलिस से लाठियां खाईं, लेकिन उफ तक नहीं की। भगतसिंह फांसी के फन्दे पर झूल गए, लेकिन ऐसी दीवानगी उन्हें भी नसीब नहीं हुई! संजू बाबा ने देश के सामने एक नई मिसाल पेश कर दी है। यह मिसाल बेमिसाल है।

अगर आप काले हिरण का शिकार कर सकते हैं तो आप राष्ट्रीय हीरो हैं। अगर आप दुबई जाकर माफिया पार्टी में नाच सकते हैं तो आप राष्ट्रीय हीरो हैं। अगर आप अंडरवर्ल्ड के आदेश पर खतरनाक हथियार अपने घर में छिपा कर रख सकते हैं तो आप राष्ट्रीय हीरो हैं। राष्ट्रीय हीरो को अदालत जेल भेज दे, यह लोकतंत्र का अपमान है।

जिनके पास दौलत है, शोहरत है, ताकत है वे लोग सकते में हैं। आज संजू बाबा को जेल हुई, कल उनका भी नम्बर आ सकता है। इसी डर के कारण फिल्म इंडस्ट्री और राजनेता संजू बाबा के पक्ष में खड़े हैं। पुलिस खरीदी जा सकती है, गवाह गायब किए जा सकते हैं, महंगे वकीलों की फौज किराये पर ली जा सकती है, लेकिन सारे जज बिकाऊ नहीं हो सकते।

अपराधियों को महिमामंडित करने की जगह, मीडिया को अदालतों के ईमानदार और साहसी फैसलों का गौरव बढ़ाना चाहिए। इस देश में न्यायपालिका ही आशा की आखिरी किरण है। अफसोस की बात तो यह है कि एक अपराधी को बचाने के लिए देश में हंगामा हो रहा है। एक और केन्द्रीय मंत्री ने बयान दिया कि संकट की इस घड़ी में कांग्रेस संजू बाबा के साथ खड़ी है। उन्हें शायद नहीं मालूम कि संजू बाबा के संकट को खत्म करने के लिए अदालतों को ही खत्म करना होगा। जो काम कांग्रेस आपातकाल में नहीं कर सकी, उसे अब कर सकती है।   सम्पर्क: ए/64, हिम्मत अपार्टमेंट, राजेन्द्र प्रसाद रोड मुलुंड (प.), मुंबई-400070

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