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 दिसंबर,  2007

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पांच साल से नहीं हुई बिजली गुल

राकेश गिरी

उत्तराखण्ड के बुढ़ाकेदार स्थित सीमांत गांव गेंवाली तक पहुंचने के लिये 14 कि.मी. की खड़ी चढ़ाई किसी के भी पसीने छुड़ा सकती है। आठ हजार फीट की ऊंचाई पर बसा यह गांव आज एक तीर्थ की तरह है। लोग यहां उस पुरुषार्थ की पटकथा को देखने आ रहे हैं, जो गेंवाली के ग्रामीणों ने पांच साल पहले लिखी थी। 

 

गांव के लोग भले ही ज्यादा शिक्षित नहीं हैं लेकिन दृढ़ इच्छा शक्ति के बूते उन्होंने इस दुर्गम गांव को 25 किलोवाट पन बिजली पैदाकर जगमग कर दिया। ज्यादा दूर होने के कारण यहां र्जा निगम का लाइन बिछाना संभव नहीं था। इसलिए ग्रामीणों ने ग्राम विकास समिति का गठन कर दिल्ली स्थित फोराद नामक संस्था के सहयोग से 25 किलोवाट की लघु विद्युत उत्पादन परियोजना का शुभारंभ किया।

 

जिला टिहरी के भिलंगना ब्लाक के अंतर्गत गेंवाली गांव जिला मुख्यालय से 95 कि.मी. दूर है। लगभग 50 परिवार वाले इस गांव की आबादी 250 के आस-पास है। यहां के लोगों का मुख्य व्यवसास भेड़-बकरी पालन है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हड्ताल की पैदल यात्रा इसी गांव से होकर जाती है। जिले का सीमांत गांव होने के कारण कस्बाई आबोहवा से हटकर यहां के लोगों की अपनी अलग दुनिया है। गांव के लोग भले ही ज्यादा शिक्षित नहीं हैं लेकिन दृढ़ इच्छा शक्ति के बूते उन्होंने इस दुर्गम गांव को 25 किलोवाट पन बिजली पैदाकर जगमग कर दिया। ज्यादा दूर होने के कारण यहां र्जा निगम का लाइन बिछाना संभव नहीं था। इसलिए ग्रामीणों ने ग्राम विकास समिति का गठन कर दिल्ली स्थित फोराद नामक संस्था के सहयोग से 25 किलोवाट की लघु विद्युत उत्पादन परियोजना का शुभारंभ किया।

1998 में शुरू हुई यह परियोजना तीन साल बाद परवान चढ़ी और सीमांत गांव आठ दिसम्बर 2001 में रोशनी से जगमगा उठा। इससे ग्रामीणों का उत्साह बढ़ गया और गांव के लोगों को इससे कई फायदे हुए। लाइन बिछाने पर खेती को होने वाले नुकसान से गांव बच गया वहीं बिजली के बार-बार गुल होने की समस्या नहीं रही। इस जनपद का गेंवाली पहला ऐसा सीमांत गांव है जहां के लोग टीवी प्रोग्राम देखते हैं। इस गांव के सम्पर्क मार्ग में हमेशा उजाला रहता है। मोटर हेड से 14 कि.मी. की दूरी पर स्थित गांव के लिए 25 किलोवाट बिजली बहुत अधिक है। गांव के लोग समीप के अन्य गांवों में भी इसका उपयोग देखना चाहते हैं। लेकिन विद्युत लाइन बिछाने का खर्च वहन न कर पाने के चलते उन्हें दिक्कत आ रही है। ग्राम विकास पंचायत समिति के अध्यक्ष कीर्ति सिंह राणा का कहना है कि यदि गेंवाली की तरह प्रत्येक गांव के लोग इस पद्धति से पन बिजली तैयार करें तो पहाड़ में विकास के नए द्वार खुल जाएंगे। गेंवाली में पहाड़ का पुरुषार्थ ऐसे समय में जगमगा रहा है जब उत्तरांखड में लोग अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार का मुंह ताक रहे हैं। लेकिन इस ठेठ गांव के लोगों ने बताया कि अभी भी पहाड़ का हौसला जिंदा है और अंधेरे पर विजय पाने की उसकी जद्दोजहद भी जारी है। सरकार चाहे तो इस पहल को एक उजाले के आंदोलन में भी बदल सकती है। और हर गांव को रोशनी से जगमग कर सकती है।

संपर्क: सिविल अस्पताल रुड़की जिला हरिद्वार, उत्तराखंड

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