फरवरी, 2008
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भारत विकास संगम-2008
संगम का नया शास्त्र......................................................................................रामबहादुर राय
विश्वग्राम से ग्रामविश्व की ओर......................................................................संजय तिवारी
कहना नहीं अब करना है..............................................................के.एन. गोविंदाचार्य राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन)
हमें अपनी सोच और अपना तौर-तरीका बदलना होगा.............................बसवराज पाटिल (कोत्तल बसवेश्वर भारतीय शिक्षण समिति)
गाय को आर्थिक आजादी का प्रतीक बनाया जाए......................................सूर्यकांत जालान (सुरभि शोध संस्थान)
इस आग को पानी नहीं हवा देने की जरूरत है.................................राजेन्द्र सिंह (तरुण भारत संघ)
गौसंरक्षण की अनूठी मिसाल है गोधाम पथमेड़ा........................................पूनम राजपुरोहित
गाय मारने वाले कौन लोग हैं, यह पता करना बहुत जरूरी है..............राजेन्द्र जोशी विनियोग परिवार
धर्म की नींव पर ही समग्र विकास संभव है....................................वैभव सुरंगे (शिवगंगा अभियान)
खेती को प्रकृति के नजदीक लाना होगा..........................................सुभाष शर्मा (जागरूक किसान)
बड़े बांधों में नहीं छोटे-छोटे चेकडैम में छिपा है उपाय.............................मनसुख भाई (जलक्रांति ट्रस्ट)
राजनीति को हम केवल नेताओं के भरोसे नहीं छोड़ सकते...................सुरेन्द्र श्रीवास्तव (लोकसत्ता मूवमेंट)
हम लोक विज्ञान के बीज सहेजने में लगे हैं............................................रवीन्द्र शर्मा
अब लोग हमारी बात को मजाक में नहीं लेते।.........................................जटाशंकर सिंह (सुरभि शोध संस्थान)
जिलों में काम करने के पहले उन्हें जानना जरूरी है................................डा. जितेन्द्र कुमार बजाज (सेन्टर फार पालिसी स्टडीज)
इक्कीसवीं सदी के विनोबा हम ही होंगे.......................................................शरद कुमार साधक (जय जगत सेवा संस्थान)
जनादेश के द्वारा हम अवज्ञा को अपना हथियार बनाएंगे...........................रमेश शर्मा (एकता परिषद)
दवाई खाने की नौबत ही क्यों आए..............................................................उत्तम माहेश्वरी (आयुर्वेद विशेषज्ञ)
चतुरी महतो का बलिदान हमें प्रेरित करता है...........................................विनोद यादव (राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन)
गंगा को जन-जन से जोड़ने की मुहिम.............................................रवि टांक