टूटा गिनीज बुक का रिकार्ड

Swami Vivek Trithankar-स्वामी विवेक तीर्थंकर

   काशी की नाटय-संस्था प्रेरणा कला मंच के निदेशक फादर प्रणोय एवं नाटय निर्देशक, गीतकार और लेखक मोतीलाल गुप्त के कुशल नेतृत्व में बनारस एवं आसपास के कुल 30 कलाकारों (मंच पर 11 एवं शेष अन्य 19 कलाकारों) के अथक श्रम, लगन और ऊर्जा ने लगातार 34 घंटे एवं 20 मिनट के भीतर 37 नाटय प्रस्तुतियों द्वारा एक नया और अनूठा विश्व कीर्तिमान रच दिया। गिनीज बुक में पिछला दर्ज रिकार्ड 29 घंटे का ही था।

इस संबंध में प्रेरणा कला मंच के निदेशक फादर प्रणोय का कहना है कि इस नाटय अनुष्ठान को आयोजित करने का विचार मोतीलाल गुप्त का पिछले 3-4 वर्षों से चल रहा था। परन्तु इसी 28 अगस्त को मोतीलाल जी के जन्मदिन पर इसकी घोषणा की गई। हमने कलाकारों से तीन महीने लगातार रिहर्सल करायी। प्रेरणा कला मंच से जुड़े़ सभी कलाकार पूरे समर्पण भाव से इसमें लगे रहे। हम सब में जुनून सवार हो गया। जोश ने हमारा साथ दिया और हमने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना हम करते आ रहे थे।

इस नाटय अनुष्ठान के निर्देशक, गीतकार एवं लेखक मोतीलाल गुप्त का कहना है कि जिस उत्साह के साथ सभी कलाकारों ने इसमें भाग लिया वह उनकी साधना का ही प्रतिफल है। इस आयोजन में हमें आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ा परन्तु सह प्रायोजक यूनियन बैंक का सहयोग बहुत अच्छा रहा। मंचन की सभी 37 नाटय प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों की तालियां हमारे जोश को और बढ़ा दे रही थीं। यह बहुत बड़ी बात है।

उक्त नाटय अनुष्ठान 21 नवंबर की सुबह 10 बजे से प्रारंभ होकर लगातर 34 घंटे 20 मिनट तक चलता रहा। जिन नाटय प्रस्तुतियों का मंचन हुआ वे क्रमवार इस प्रकार हैं : अमानत, दुनिया का मेला, गांधी ने कहा, बुरे काम का बुरा नतीजा, मैकू, हाय रे पानी, परिवर्तनम, साईत सगुन, पंच परमेश्वर, सपना सजल बा, काला बादल, क्या करें क्या न करें, जब जागो तभी सबेरा, दौड़-दौड़, दो बूंद जिंदगी की, प्यार की छाया, साथी हाथ बढ़ाना, राजा नाही सेवक चाही, घूस को घूसा, लगन, सुई-पानी, क का सम्राट, डाल-डाल पर जान, पुनर्मिलन, बोलते क्यों नहीं, सत्यपथ, असली धन, बढ़िए और बढ़ाइए, गिरोह बंद, कफन, हिंसा परमो धर्म, पूर्वाग्रह, कमला का कमाल, एक और एक, भगवान की देन, सवा सेर गेहूं और प्रेम की बोली बोल।

इस विश्व कीर्तिमानी नाटय अनुष्ठान में भाग लेने वाले मुख्य कलाकार हैं- भोला सिंह राठौर, विवेक गुप्त, हरिश्चंद्र पाल, मुकेश झंझरवाला, असलम शेख, अजय बोरा थापा, धनरत यादव, डा. अवनीश द्विवेदी, दीपक पांडेय (संगीत) और अजय रोशन। इन्होंने सभी नाटकों में अलग-अलग पात्रों के रूप मे अभिनय किया। यही नहीं लाइट और साउंड व्यवस्था भी लगातार विवेक त्रिपाठी और शैलेन्द्र कुमार ने बखूबी  सम्हाली।

मुरालीलाल मेहता प्रेक्षागृह में रचे गए इस अनूठे विश्व कीर्तिमान के पूरे समय लगभग सभी दर्शकों ने न्यूनतम छह से 10 प्रस्तुतियों तक का आनंद उठाया। समय-समय पर दर्शक तो बदलते रहे पर हाल पूरी तरह खचाखच भरा रहा। विश्व कीर्तिमान टूटने पर सभी नाचने लगे। इस मौके पर भव्य समापन समारोह भी आयोजित हुआ जिसमें बनारस के प्रमुख लोग शामिल हुए।

This entry was posted on Saturday, January 2nd, 2010 and is filed under गतिविधियाँ. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

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