मजदूर होगा गरीबी से दूर |
-निर्भय कुमार कर्ण
मजदूर का दूसरा नाम गरीब होता है जो अपनी पूरी जिंदगी गरीबी के चंगुल से निकलने का प्रयास करता है लेकिन प्राय: सफल नहीं हो पाता है। इसके पीछे मुख्य कारण है- अशिक्षा व बालमजदूरी।
माना जाता है कि अधिकांश समस्याओं का समाधान शिक्षा ही है। मजदूर परिवार की मानसिकता होती है कि बच्चों को मजदूरी से जोड़कर यानि काम से जोड़कर गरीबी को दूर किया जाए। इस वजह से बच्चों को बाल मजदूरी के लिए ढकेल दिया जाता है। मालिकों का स्वार्थ मजदूरों के हक में आड़े आ जाता है। अधिकांश लोग मानते हैं कि गरीबी के कारण बाल मजदूरी बढ़ती है लेकिन हमारा मानना है कि बालमजदूरी ही गरीबी की जड़ है। क्योंकि यदि एक बार मजदूर परिवार अपने बच्चों को मजदूरी के स्थान पर स्कूल जाने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दे तो केवल बाल मजदूरी पर ही अंकुश नहीं लगेगा बल्कि गरीबी भी उनसे धीरे-धीरे दूर होती जाएगी।’ यह सोच है हिन्द खेत मजदूर पंचायत की। आइए जानते हैं कि ये हिन्द खेत मजदूर पंचायत है क्या?
मजदूरों को उनके अधिकार दिलाने के लिए हिन्द खेत मजदूर पंचायत सन 1988 से बिहार राज्य में संघर्षरत है। अभी तक करीब 75,000 से ज्यादा मजदूर इस संस्था के सदस्य बन चुके हैं। इसकी स्थापना में एस. एम. जोशी का विशेष योगदान रहा है। संस्था संगठित व असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत सभी प्रकार के श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने का प्रयास करती है। इसका मुख्य लक्ष्य है- श्रमिकों को उनके हितों के अनुरूप सरकारी योजनाओं व नीति के बारे में जागरूक कर लाभ दिलवाना एवं शिक्षित करना।
हिन्द खेत मजदूर पंचायत के महामंत्री अलीमुद्दीन अंसारी का कहना है, ”मजदूरों का सर्वांगीण विकास कैसे हो, इसी आधार पर हम काम करते हैं। इसके तहत रोजगार गारन्टी कानून, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम में संशोधन, सामाजिक सुरक्षा कानून, स्वास्थ्य सुरक्षा, भविष्य निधि, श्रमिक वेलफेयर बोर्ड के लिए गांव, प्रखण्ड, जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर आन्दोलन व धरना-प्रदर्शन करते हैं। शिक्षा की कमी ही मजदूरों को शोषित होने पर मजबूर कर देती है इसलिए मजदूरों के बच्चों को विद्यालयों से जोड़ना हम अति आवश्यक कार्य मानते हैं। वर्तमान में बिहार के आठ जिलों में हिन्द खेत मजदूर पंचायत काम कर रही है। ये आठ जिले हैं- पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, किशनगंज, अररिया, कटिहार व भागलपुर। इनमें पूर्णिया, अररिया, किशनगंज में हमने विद्यालय खोल रखे हैं जहां मजदूरों के बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दी जाती है।”
हिन्द खेत मजदूर पंचायत के विद्यालय में पढ़ रही 12 वर्षीय संजिला कहती है कि जिस गांव में मैं रहती हूं वहां के आस पास के क्षेत्रों में करीब 30 ईंट भट्ठा हैं। मैं पहले किशनगंज के सालगुड़ी के ईंट भट्ठा में काम करती थी। संस्था के कार्यकर्ताओं की प्रेरणा से मैं काम छोड़ स्कूल में पढ़ने लगी। विद्यालय से जुड़ने के बाद लोगों ने कहा कि एक मुसलमान की लड़की स्कूल में पढ़ रही है। मजहब के खिलाफ काम कर रही है। लेकिन सब के विरोध को सहते हुए भी मैं यहां पढ़ रही हूं। जब से मैंने स्कूल आना शुरू किया है तब से मैंने काफी कुछ सीखा और समझा है।
अंसारी बताते हैं कि अपने विद्यालयों के माध्यम से ही शिक्षा ही नहीं हम आस-पास के वातावरण को बदलने का भी प्रयास करते हैं। विद्यालय के आस-पास क्षेत्रों में लूट-पाट, मार-पीट, शराब पीकर हो-हल्ला आदि घटनाओं में कमी हो रही है। विद्यालय में पढ़ रहे बच्चे अपने मजदूर माता-पिता को शिक्षित कर रहे हैं। इससे मजदूरों की मानसिकता में काफी बदलाव आया है एवं वे अपने आप को शिक्षा से जोड़कर जागरूक होने का प्रयास कर रहे हैं।
अंसारी आगे कहते हैं, ”शुरूआत में बच्चों को विद्यालय से जोड़ने एवं मजदूरों को जागरूक करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन बदलते हुए परिवेश में कठिनाइयां कम होने लगीं। मजदूर लोग शिक्षा के माध्यम से दूसरे लोगों का होता हुआ विकास देख शिक्षा का महत्व समझने लगे हैं। इसलिए अब बच्चों को विद्यालय से जोड़ने में कोई विशेष दिक्कत नहीं आती। हम पहले ईंट भट्ठा की चिमनी, चाय बगान, निर्माण कार्य स्थल एवं अन्य जगहों पर जाते हैं, जहां बच्चे कार्य कर रहे होते हैं। उन बच्चों और उनके मां-बाप से बातचीत करते हैं। उन्हें शिक्षा की अहमियत और मजदूरों के हकों के बारे में बताते हैं। इस दौरान कभी-कभी कार्यस्थलों के मालिकों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ता है। तब हम संयम से काम लेते हुए उन्हें भी बालमजदूरी से संबंधित व मजदूरी की सरकारी दरों से संबंधित बाते बताते हैं। यदि वे आसानी से नहीं समझते हैं तो सरकारी अधिकारियों की मदद लेकर उनके साथ सख्ती से पेश आते हैं। उन्हें यह बात सुनिश्चित करने के लिए मजबूर करते हैं कि उनके कार्यस्थल पर अब किसी प्रकार की बाल मजदूरी नहीं होगी व मजदूरों को उचित माहौल एवं व्यवस्था सहित सरकार द्वारा तय मजदूरी दी जाएगी। हमारे इन प्रयासों से बच्चों का रुख विद्यालय की ओर हो जाता है और मजदूरों को उचित मजदूरी प्राप्त होती है। मजदूरों का राज्य से पलायन रोकने के लिए भी कार्य किया जाता है। इसके अलावा पलायन किये मजदूरों का शोषण न हो, इस ओर भी हम सक्रिय रहते हैं।”
हिन्द खेत मजदूर पंचायत ने बीते दिनों अपने कार्यों में विस्तार दिया है। अब वो मजदूरों की लड़कियों के उत्थान के लिए भी आगे आए हैं। अररिया जिले के मीरगंज गांव में लड़कियों को सिलाई प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार की ओर उन्मुख किया जा रहा है। इसके अलावा केन्द्र में और भी कई व्यावसायिक प्रशिक्षण दिये जा रहे हैं। पूर्णिया, किशनगंज, अररिया में प्रौढ़ शिक्षा का सकारात्मक असर अजनबी व्यक्ति भी महसूस कर सकता है।
हिन्द खेत मजदूर पंचायत की सरकार से ऐसी कई ऐसी मांगे हैं जो अगर मान ली जाएं तो मजदूरों की जिंदगी में उल्लेखनीय सुधार आ सकता है। जैसे कि राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी अधिनियम में सुधार कर वर्ष में सभी दिन काम देने का प्रावधान किया जाए। न्यूनतम मजदूरी दर बढ़ाने की व्यवस्था की जाए। बाल श्रमिक प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। प्राथमिक एवं उच्च शिक्षा नि:शुल्क दी जाए। सभी को एक समान शिक्षा उपलब्ध हो। इस तरह की अन्य कई मांगों को भी पूरा करवाने के लिए संस्था संघर्षरत है। संस्था मानती है कि इस मांगों की पूर्ति होने से मजदूर अपने आप को कभी असहाय व बेबस महसूस नहीं करेंगे।
हिन्द खेत मजदूर पंचायत आईएफबी डब्लूडब्लू चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट के माध्यम से शिक्षा का सहारा लेकर बाल मजदूरी की प्रथा को जड़ से समाप्त करने की ओर अग्रसर है। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियां बच्चों को काम करने पर मजबूर करती हैं। लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता है कि खराब शिक्षा, स्कूल का अभाव भी बाल मजदूरी का महत्वपूर्ण कारण है। इसलिए यह जरूरी है कि स्कूलों में शिक्षा का स्तर सदैव ऊंचा बना रहे जिससे बच्चे काम पर पुन: वापस न लौटे। हिन्द खेत मजदूर पंचायत इस कोशिश में भी लगी हुई है कि शिक्षा की प्रणाली में आवश्यक बदलाव किये जाएं।



शिक्षा मिटा दे गरीब को, इतना तो है ज्ञात.
यह शिक्षा कुछ भला करे, लगती कल्पित बात.
लगती कल्पित बात, कटी हर तरह जमीं से.
भ्रम फ़ैलाती, भेद बढाती हमारा हमीं से.
कह साधक इतना ही अच्छा है शिक्षा में .
रोष नहीं बढने देती है युवा शक्ति में .
गरीब हो या अमीर हो, सभी दुखी इकसार.
नये सिरे से सोच तो, तथ्यातथ्य विचार.
तथ्यातथ्य विचार, विषय है सुख जीवन का.
जीते हैं सब देह-भाव में, क्या हो सुख का?
कह साधक कैसे भी जागृत अब जीवन हो.
सब पायें सुख-समृद्धि,ना अमीर-गरीब हों.