अलसी की महिमा

- पंकज विद्यार्थी

अलसी मानव जीवन के लिए जीवन शक्ति है। यह आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक है। इसे दैनिक जीवन में आसानी से अपनाया जा सकता है। इसके सेवन से व्यक्ति उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा डायबिटीज से मुक्त रहता है।

 

अलसी मानव जीवन के लिए जीवन शक्ति है। यह आयुवर्धक, आरोग्य- वर्धक है। इसे दैनिक जीवन में आसानी से अपनाया जा सकता है। इसके सेवन से व्यक्ति उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा डायबिटीज से मुक्त रहता है। डब्लूएचओ भी इसे सुपरस्टार फूड का दर्जा देता है। अलसी के पौधे पर नीले रंग के फूल आते हैं। अलसी के बीज तिल जैसे छोटे, भूरे या सुनहरे रंग के तथा चिकने होते हैं। अलसी में मुख्य पौष्टिक तत्व ओमेगा-3, फेटी एसिड, एल्फा लिनोलेनिक एसिड, लिगनेन, प्रोटीन व फाइबर होते हैं। अलसी गर्भावस्था व वृद्वावस्था में बेहद फायदेमंद है। महात्मा गांधी ने भी स्वास्थ्य पर शोध किया था और अनेकों पुस्तकें भी लिखीं। उन्होंने अलसी पर भी शोध किया और इसके चमत्कारी गुणों को पहचाना। उन्होंने अपनी एक पुस्तक में लिखा है- ‘जहां अलसी का सेवन किया जायेगा, वह समाज स्वस्थ व समृद्ध रहेगा।’

8वीं शताब्दी में फ्रांस के सम्राट चार्ल्स मेगने भी अलसी के गुणों से बहुत प्रभावित थे। उनकी इच्छा थी कि उनकी प्रजा रोज अलसी का सेवन करे, ताकि वह निरोगी रहे व दीर्घायु हो। इसके लिए उन्होंने कड़े कानून भी बना दिये थे। अलसी एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक बीज है, जो हमें कुदरत प्रदत है। अलसी में लगभग 18 से 20 प्रतिशत ओमेगा-3, फेटी एसिड, एएलए पाया जाता है। एएलए यानी अल्फा लिनोलेनिक एसिड शरीर की रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ रखता है। आंख, मस्तिष्क और नाड़ीतंत्र का विकास करता है व इनकी हर कार्य प्रणाली में सहायक होता है। यह स्मरण क्षमता को बढ़ाता है, रक्तचाप व रक्त शर्करा को नियंत्रण में रखता है, कोलेस्ट्रोल नियोजन में सहायक होता है और जोड़ों को स्वस्थ रखता है। यह शरीर का अनावश्यक भार कम करता है। इसके सेवन से यकृत, वृक्क और अन्य सभी ग्रंथियों की कार्य क्षमता बढ़ाती है।

शरीर में ओमेगा-3 की कमी व इन्‍फलेमेशन पैदा करने वाले ओमेगा-6 के ज्यादा हो जाने से प्रोस्टाग्लेडिंग ई-2 बनते हैं, जो लिम्फोसाइट्स व माक्रोफाज को अपने पास एकत्रित करते हैं व फिर ये साइटोकाइन व कोक्स एंजाइम का निर्माण करते हैं और शरीर में इन्फलेमेशन फैलाते हैं। हमारे शरीर के ठीक प्रकार से संचानल के लिए ओमेगा-3 व ओमेगा-6 दोनों ही बराबर यानी 1:1 अनुपात में होने चाहिएं। ओमेगा-3 नायक है तो ओमेगा-6 खलनायक। ओमेगा-6 की मात्रा बढ़ने से शरीर में इन्फलेमेशन फैलता है, जबकि ओमेगा-3 इसे दूर करता है। ओमेगा-6 हमें तनाव, सरदर्द, डिप्रेशन का शिकार बनाता है तो ओमेगा-3 हमारे मन को प्रसन्न रखता है। क्रोध भगाता है, स्मरण शक्ति व बुद्धिमता बढ़ाता है। ओमेगा-6 हमारे शरीर में रोग पैदा करता है तो ओमेगा-3 रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। ओमेगा-6 उम्र को कम करता है तो ओमेगा-3 उम्र को बढ़ाने का कार्य करता है।

पिछले कुछ दशकों से हमारे भोजन में ओमेगा-6 की मात्रा बढ़ती जा रही है। नए-नए फास्ट फूड व जंकफूड ओमेगा-6 से भरपूर होते हैं। बाजार में बिक रहे रिफाइंड तेल भी ओमेगा-6 से भरपूर होते हैं। हाल ही में हुए शोध से ज्ञात हुआ है कि हमारे भोजन में ओमेगा-3 बहुत कम व ओमेगा-6 अधिक मात्रा में पाये जाने के कारण हम उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, स्ट्रोक, डायबिटीज, मोटापा, गठिया, अवसाद, दमा, कैंसर आदि रोगों के शिकार हो रहे हैं। ओमेगा-3 की यह कमी हम 30 से 60 ग्राम अलसी से पूरी कर सकते हैं। अलसी दिल की धमनियों में खून के थक्के बनने से रोकती है तथा हृदयाघात व स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचाव करती है।

अलसी में दूसरा महत्वपूर्ण पौष्टिक तत्व लिगनेन होता है। अलसी लिगनेन का सबसे बड़ा स्रोत है। लिगनेन एन्टीबैक्टीरियल, एन्टीवायरल, एंटी फंगल और कैंसर रोधी है। लिगनेन कोलेस्ट्रोल कम कर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है। लिगनेन महिलाओं के मासिक धर्म संबंधी अनियमितताएं ठीक करता है। लिगनेन हमें प्रोस्टेट, बच्चेदानी, स्तन, आंत, त्वचा आदि के कैंसर से बचाता है। यदि मां के स्तन में दूध नहीं आ रहा है तो उसे अलसी खिलाने के 24 घंटे के भीतर स्तन में दूध आने लगता है। यदि मां अलसी का सेवन करती है तो उसके दूध में पर्याप्त ओमेगा-3 रहता है, जिससे बच्चा बुद्विमान व स्वस्थ पैदा होता है। अलसी में प्रायः 27 प्रतिशत घुलनशील व अघुलनशील दोनों ही तरह के फाइबर होते हैं। अतः अलसी कब्ज, मस्से, बवासीर, भगंदर, आदि में राहत देती है। इतनी उपयोगी चीज हमारे खान-पान में नहीं हो, इससे बड़ी भूल क्या होगी?

 

 

This entry was posted on Saturday, June 2nd, 2012 and is filed under विविधा. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. Responses are currently closed, but you can trackback from your own site.

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