कर्मयोग

-श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय-तीन)
इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविता:।
तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुघ्क्ते स्तेन एव स: ।। 12।।
अर्थ: -यज्ञ से पुष्ट हुए देवता भी तुम लोगों को बिना मांगे ही कर्तव्य पालन की आवश्यक सामग्री देते रहेंगे। इस प्रकार उन देवताओं की दी हुई सामग्री को दूसरों की सेवा में लगाये बिना जो मनुष्य स्वयं ही उसका उपभोग करता है, वह चोर ही है।
व्याख्या: यह शरीर माता-पिता से मिला है और इसका पालन-पोषण भी उन्हीं के द्वारा हुआ है। विद्या गुरुजनों से मिली है। देवता सबको कर्तव्य-कर्म की सामग्री देते हैं। ऋषि सबको ज्ञान देते हैं। पितर मनुष्य की सुख-सुविधा के उपाय बताते हैं। पशु-पक्षी, वृक्ष, लता आदि दूसरों के सुख में स्वयं को समर्पित कर देते हैं। (यद्यपि पशु-पक्षी आदि को यह ज्ञान नहीं रहता कि हम परोपकार कर रहे हैं, तथापि उनसे दूसरों का उपकार स्वत: होता रहता है।) इस प्रकार हमारे पास कुछ भी सामग्री- बल, योग्यता, पद, अधिकार, धन सम्पत्ति आदि है, वह सब-की-सब हमें दूसरों से ही मिली हैं। इसलिये इनको दूसरो की ही सेवा में लगाना है।
शरीर, इन्द्रियां, …

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विशेष रिपोर्ट

गांधी के विचारों का दर्पण

गांधी के विचारों का दर्पण

किताब के बारे में गांधी जी ने स्वयं कहा है कि मेरी यह छोटी सी किताब इतनी निर्दोष है कि बच्चों के हाथ में भी यह दी जा सकती है। यह किताब द्वेष धर्म की जगह प्रेम धर्म सिखाती है। हिंसा की जगह आत्म-बलिदान को स्थापित करती है। और पशुबल के खिलाफ टक्कर लेने के लिए आत्मबल को खड़ा करती है।

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  • मनुष्यता का घोषणा पत्र है हिन्द स्वराज
  • ‘हिन्द स्वराज’ पढ़ने का अधिकारी कौन?
  • सार्थक प्रयास

    ग्रामीणों की सशक्त आवाज बनता अखबार

    ग्रामीणों की सशक्त आवाज बनता अखबार

    ये अखबार किसी खास वर्ग की आवाज न रहकर पूरे गांव की आवाज बन गया है। उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण अखबार सिर्फ वर्ग विशेष की खबरें नहीं छापते, बल्कि गांव की समस्याओं और कुछ विशेष रूप में विश्व की घटनाओं को भी शामिल करते हैं। राष्ट्रीय परिदृश्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए इनमें से एक अखबार ‘खबर लहरिया’ को चमेली देवी जैन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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  • वृक्षारोपण का अनूठा तरीका
  • सामाजिक पहल से खुला विकास का रास्ता
  • परिदृश्य

    केंद्रीय बजट का ७% गावों को मिले

    केंद्रीय बजट का ७% गावों को मिले

    आज देश की 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। अत: केन्द्र सरकार के बजट की कम से कम 7 प्रतिशत राशि सीधे ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की जाए।

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  • भारत की महिलाएं अभी जीवित हैं
  • दरिद्र का दरिद्रनारायण का कौन
  • अतीत

    लोकतंत्र के प्राचीनतम प्रयोग

    लोकतंत्र के प्राचीनतम प्रयोग

    वर्तमान संसद की तरह ही प्राचीन समय में परिषदों का निर्माण किया गया था। जो वर्तमान संसदीय प्रणाली से मिलता-जुलता था। गणराज्य या संघ की नीतियों का संचालन इन्हीं परिषदों द्वारा होता था। इसके सदस्यों की संख्या विशाल थी।

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  • उपेक्षित और गुमनाम ‘एक दर्शन’
  • भारत के प्राचीन शिक्षा केन्द्र
  • गतिविधियाँ

    ‘हिन्द स्वराज’ पर संगोष्ठी

    'हिन्द स्वराज' पर संगोष्ठी

    महात्मा गांधी द्वारा रचित लोकप्रिय और प्रेरणादायी पुस्तक ‘हिन्द स्वराज’ की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘हिन्द स्वराज और वर्तमान भारतीय संदर्भ’ विषय पर वाराणसी शहर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी 19 जून 2009 को सम्पन्न हुई।

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  • गंगा आन्दोलन की रणनीति तैयार
  • एक और समुंद्र मंथन
  • चर्चा में

    सामाजिक दायित्व से दूर होती मीडिया

    सामाजिक दायित्व से दूर होती मीडिया

    संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकारों के सार्वभौम घोषणा-पत्र की प्रस्तावना और घोषणा को पढ़ा जाये, जिसे महासभा ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया है, तो मालूम होगा कि शायद ही कोई राष्ट्र होगा जो वास्तव में अपने नागरिकों एवं अन्य देशों के निवासियों के जीवन को मानवाधिकारों की भावना के अनुकूल विकसित करने के प्रयास कर रहा है।

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  • सवालों के घेरे में ईवीएम मशीन
  • जनता ने पलट दी बाजी
  • विविधा

    कर्मयोग

    कर्मयोग

    हमारे में जो कुछ भी विशेषता है, वह दूसरों के लिये है, अपने लिये नहीं। अगर सभी मनुष्य ऐसा करने लगे तो कोई भी बद्ध नहीं रहेगा, सब जीवन्मुक्त हो जायंगे।

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  • पुस्तक समीक्षा : विश्व की सभ्यता पर एक नजर
  • पुस्तक समीक्षा : समृद्धि क्या है?
  • साहित्य

    कहानी : पिया घर आये

    कहानी : पिया घर आये

    प्रेमपूर्वक एक-दूसरे को ऐसे देख रहे थे कि अगर संसार में जीते हुए केवल यही काम उन्हें करना होता तो कोई भी धार्मिक पुस्तक उनमें मोक्ष की इच्छा पैदा नहीं कर सकती थी।

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  • कविता : चांद का आह्वान
  • दृष्टि : फलसफा-ए-जिंदगी

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