भारतीय मूल्यों पर आधारित वैकल्पिक व्यवस्था की पक्षधर हिन्दी मासिक पत्रिका

अप्रैल,  2008

पिछले अंक

हमारे बारे में

संपर्क करें

सदस्य बनें

 विविध स्थाई स्तंभ

 भारतगाथा

 कहानी

अपना ई- मेल देखें

 जी-मेल

 हाट-मेल

 याहू-मेल

 रेडीफ-मेल

 सिफी-मेल

हिन्दी समाचार-पत्र

 अमर उजाला

 जागरण

 भाष्कर

 नवभारत टाइम्स

 प्रभासाक्षी

 सहारा समय

 बी.बी.सी हिन्दी

 घर बचओ- देश बचाओ अभियान

 

 

 

 

 


रोजी की राह में रोड़े बड़े (अफरोज आलम 'साहिल')

पिछले दिनों झालावाड़ के मनोहरथाना ब्लाक में एक 'जन सुनवाई' हुई। इस 'जन सुनवाई' के बाद सामने आने वाली भ्रष्टाचार की कहानियां वाकई पूरे देश को चौंकाने वाली हैं। घोटाले हजारों में नहीं बल्कि लाखों और करोड़ों में थे। सिर्फ मनपसर ग्राम पंचायत के एक छोटे से गांव में 2, 11, 720 रुपये का गबन एक ही कार्य में पाया गया। >>विस्तार

 

रोजगार के नाम पर छलावा (हिमांशु शेखर)

2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी

योजना देश के दो सौ जिलों में लागू

की गई। उस वक्त इस महत्वाकांक्षी

योजना को लेकर काफी लंबे-चौड़े वायदे

किए गए। पर पिछले कुछ महीनों से

इस तरह के कई मामले सामने आ रहे

हैं जिनसे यह पता चल रहा है कि इस

योजना में भी भ्रष्टाचार का घुन लग चुका है और अफसरशाही ने तो जैसे इसे असफल बनाने की ही ठान ली है। >>विस्तार

 
 

लालू का धोखा (अरुण कुमार सिंह)

जिस लालू के नेतृत्व में बिहार अराजकता का नमूना बन गया था उन्हीं लालू के मंत्रित्व काल में रेल मुनाफा कैसे कमाने लगी?  >>विस्तार

 

 Loan Waiver:

A desperate decision taken without needed care (S. Gurumurthy) The farm loan waiver of Rs 60,000 crore was at the heart of Mr Chidambaram’s oration on February 29. But the heart of his speech is nowhere to be found in the body of his Budget. >>विस्तार

नफरत का कारोबार चले (प्रमोद द्विवेदी) जर्मनी से लेकर युगांडा तक और असम से लेकर महाराष्ट्र तक इस अफवाह-तंत्र को आजमाया जा चुका है। नाकाम बुध्दिविलासियों में यह बहस कई बार उठती है कि सांप्रदायिकता, नस्लवाद, जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद में कौन ज्यादा मारक, खतरनाक या प्रभावी है। इनमें से कौन देशतोड़क है? कौन इंसानियत को शर्मसार करता है?  >>विस्तार

   

हिंसा का राजनीतिक दंश (मनोज कृष्ण) दो अलग-अलग विचारधारा से ताल्लुकात रखने वाले इन दलों के

बीच जमकर गाली-गलौज और पत्थरबाजी हुई। बाद में एक दूसरे के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सारा मामला

पेंडुलम की तरह लटकता छोड़ दिया गया।  >>विस्तार

वेदों का रचनाकाल (गुंजन अग्रवाल)

वेदों की रचना कब हुई? हिंदू धर्म में वेदों को 'अपौरुषेय' कहा गया है अर्थात् जिसकी रचना किसी पुरुष-विशेष द्वारा नहीं हुई। इसका तात्पर्य यह है कि वैदिक ट्टषि वेद-मंत्रें के व्यक्तिगत रचयिता नहीं थे, बल्कि वे वेद-मंत्रें के 'द्रष्टा' थे। >>विस्तार

 

इस अंक के अन्य लेख-

 

 राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून से जुड़ी कुछ

 बुनियादी बातें >>विस्तार

 

 भूख से मुक्ति अधिकार  अभियान                

 

 वरण कथा

 कृष्ण: क्या था उनके जीवन का उद्देश्य >>विस्तार

 सूर्यकांत बाली

 भारतगाथा

 समाजवाद का भविष्य >>विस्तार

 भगवतीधर वाजपेयी

 विविधा

 वर्तमान शिक्षा पद्धति : कमियां एवं विकल्प >>विस्तार

 आनन्द सुब्रमण्यम शास्त्री

  विविधा

 गरीब देश के सफेद हाथी >>विस्तार

 मधु काबरा

  विविधा

 गुलामी का नया रूप >>विस्तार

 अमान अहमद

  विविधा

 नुक्कड़ नाटकों के जरिए बड़ा काम >>विस्तार

 भारतीय पक्ष ब्यूरो

  सार्थक प्रयास

 खंडहर की आवाज >>विस्तार

 रामदरश मिश्र

  कहानी

 तूफानों में प्रज्ज्वलित एक ज्योति >>विस्तार

 कृष्ण कुमार भारतीय

  िसाल

 हिन्दू संहति मंच की घोषणा >>विस्तार

 उम्मेद सिंह बैद 'साधक'

  हलचल

 गौ, गंगा और हिमालय की रक्षा हेतु हम

 जनजागरण करेंगे >>विस्तार

 श्री गोपाल मणि जी महाराज

  बातचीत

 गंगा-संस्कृति प्रवाह यात्रा

  सेवा,  साधना,  संवाद और संघर्ष के संकल्प के साथ 

  पूरा हुआ पहला चरण

>>विस्तार
 भारतीय पक्ष ब्यूरो  गतिविधि

 राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन

स्थाई स्तंभ

सार्थक प्रयास

 

      भारतगाथा

 

कहानी

   

Austin e-commerce