Legacy of Rajendra Chola-I

Pankaj Saxena

When the British came to India they started writing history in which some of the most glorious kings and empires of India were downplayed. After Independence no serious attempt was made to counter that trend and we still keep repeating four or five names as the greatest rulers of India. But time has come now to commemorate the true pioneers of India.
Rajendra Chola I, the son of Rajaraja Chola was one of the greatest rulers of the Chola Empire and of India. He became the Chola Emperor in 1014 CE, exactly one thousand years ago and ruled for around 30 years. During his reign Chola Empire became one of the greatest and longest surviving Empires of India. Capitalizing on the gains made by his father, who was also a great king, he pushed the boundaries of the Chola Empire far up in the north, to the borders of the Ganga. Tamil presence in the Ganga-Doab region was unprecedented and was never repeated again on such scale. Rajendra Chola tried to unify India by the infusion of culture and arts.
Not only did he extend his Empire in India, he …

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विशेष रिपोर्ट

Legacy of Rajendra Chola-I

Legacy of Rajendra Chola-I

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  • कारगर है होम्योपैथी
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    प्रदीप रोशनः एक सूरज जो समय से पहले ढल गया

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    आई.आई.टी. का उन्नत भारत अभियान

    गत 7 सितंबर से 9 सितंबर के बीच दिल्ली आई.आई.टी. में एक तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें तकनीकी संस्थाओं के ज्ञान, स्वैच्छिक संगठनों के अनुभव और सरकार के संसाधनों को मिलाकर गांवों के विकास के लिए एक अभियान की रूपरेखा तैयार की गई जिसे आई.आई.टी. दिल्ली के तत्वावधान में चलाया जाएगा। अभियान […]

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  • महिला विरोधी लेख के खिलाफ प्रदर्शन
  • कोल्हापुर में होगा चौथा भारत विकास संगम
  • चर्चा में

    अवसर की समानता बेहद जरूरी है

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    विपुल शर्मा दीनानाथ बत्रा ‘शिक्षा बचाओ आन्दोलन समिति’ के संस्थापक तथा राष्ट्रीय संयोजक  हैं। वे विद्या भारती के महासचिव भी रह चुके हैं। वे पंजाब तथा हरियाणा में अंग्रेजी तथा हिन्दी विषयों के अध्यापक तथा प्रधानाचार्य रहे हैं। सिविल सर्विस परीक्षा में सीसैट लागू किए जाने के संघ लोक सेवा आयोग के फैसले को सबसे […]

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  • विघटन के कगार पर इराक
  • नई राह दिखाएं साधु-संत
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    राजस्थानी लोक कथाओं के कुबेर ‘बिज्जी’

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    पप्पू राम मीणा विजयदान देथा को साहित्य जगत के साथ-साथ दूसरे कला प्रेमी लोग बिज्जी के नाम से भी जानते हैं। कहते हैं कि व्यक्ति को अपनी जड़ और जमीन को कभी नहीं भूलना चाहिए। बिज्जी उसी जड़ और जमीन के साहित्यकार हैं। उन्होंने अपनी जमीन को ही अपनी प्रतिभा का प्रथम हकदार माना और […]

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  • तपोनिधि अया‍ची मिश्र
  • राम, कृष्ण और शिव
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    The Kashmiri “Freedom” Fighters

    Francois Gautier  Western correspondents (and unfortunately sometimes Indian journalists) keep lionizing the Kashmiri “freedom fighters” and demonising the “brutal” Indian army. But nobody bothers to remember Kashmiris were almost entirely Hindus or Buddhists, before they were converted by the invading Muslims six centuries ago. True, today these Muslims in Kashmir have not only accepted as […]

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