एड्स पर संदेह

-डा. मनोहर भण्डारी

दुनिया के अनेक वैज्ञानिक चीख- चीख कर कह रहे हैं कि कुछ वैज्ञानिकों, दवा कम्पनियों, जांच के उपकरणों और रसायन बनाने वाली कम्पनियों तथा मीडिया के सहयोग से एड्स नामक काल्पनिक बीमारी, दुनिया पर थोपी गई है। उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए एक किस्म का सक्षम नेटवर्क पूरी शक्ति से काम कर रहा है।

एड्स दुनिया की पहली ऐसी बीमारी है, जिसके वैज्ञानिक पहलू जगजाहिर करने में इसके आविष्कारकर्ता असमर्थ सिध्द हुए हैं। इसके वैज्ञानिक पक्ष को जानने के लिए नोबेल फरस्कार से सम्मानित, नामित और अन्य अंतराष्ट्ररीय स्तर के वैज्ञानिकों के प्रयासों को येनकेन प्रकारेण नजरअंदाज किया गया, टाला गया, दबाया गया तथा बौखलाहट में सजा के योग्य करार दिया गया। इसकी वैज्ञानिकता को चुनौती देने वाले वैज्ञानिकों की संख्या एक-दो नहीं बल्कि दो हजार से ज्यादा पहुंच चुकी है। इंटरनेट इस पर वाद-विवाद की अनेक वेबसाइट मौजूद हैं। अब तक की सबसे घातक, अपराजेय और रोगी की मौत की शुरुआत पहले दिन से ही प्रारंभ कर देने वाली इस विश्वव्यापी बीमारी के वैज्ञानिक पक्ष की गोपनीयता से, महात्मा गांधी की इस टिप्पणी को बल मिला है कि ‘एलोपैथी एक चिकित्सा पध्दति नहीं, …

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विशेष रिपोर्ट

सस्ती दवाइयों पर आफत

सस्ती दवाइयों पर आफत

-सुमन नारायणन
पिछले सात वर्षों में भारत द्वारा लेटिन अमेरिका को निर्यात की गई जेनेरिक दवाईयों को नियमित रूप से यूरोप के देशों में जब्त किया जा रहा है। गत वर्ष हालैंड के तटीय नगर रोटरडेम के कस्टम अधिकारियों ने ब्राजील जा रही उच्च रक्तचाप के लिए इस्तेमाल में आने वाली भारत में निर्मित जेनेरिक [...]

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  • होम्योपैथी की उपेक्षा ठीक नहीं
  • संभव है सहज, सुलभ स्वास्थ्य
  • सार्थक प्रयास

    एक उद्यमी किसान ऐसा भी

    केंचुआ खाद बनाना शुरू किया और 1999 में कीटनाशी बनाकर खेतों में खेती करने लगे। कीटनाशी बनाने में भी नीम, आक, धतूरे का इस्लेमात करने से साइड इफेक्ट का खतरा नहीं रहा

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  • हस्तक्षेप का हौसला…
  • ‘शिक्षांतर’ बनाती शिक्षा को बेहतर
  • परिदृश्य

    यह पाखंड ही नहीं अज्ञानता भी है

    यह पाखंड ही नहीं अज्ञानता भी है

    भारतीय राजनीति आज ऐसे खतरनाक मोड़ पर आकर खड़ी है जहां आर्थिक दिशा के संदर्भ में मुख्यधारा के नेताओं को यह पता ही नहीं कि क्या होना चाहिए, अंततः भारत के हित में क्या है, दुनिया के हित में क्या है, मानवता के हित मे क्या है, जब इसका पता ही नहीं तो फिर वे अंधेरे में ही तीर चलाएंगे और यही हो रहा है। किसी नेता या पार्टी से निजी घृणा या विरोध का यहां प्रश्न नहीं है

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  • शत्रुओं से स्नेह
  • भारत पर एटम बम के हमले का खतरा
  • अतीत

    सिक्के पर श्रीराम

    सिक्के पर श्रीराम

    2744 सिक्कों में से 61 सिक्कों पर ‘थ्री मेन’ (तीन मानव आकृतियों) का अंकन है। इन मानव आकृतियों का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद मुद्राशास्त्रियों का मत है कि इन सिक्कों पर बायीं ओर से क्रमश: देवी सीता, श्रीराम और लक्ष्मण का अंकन हुआ है।

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  • प्राचीन भारत के शास्त्र
  • भारतीय मुद्रा के निर्माण की कहानी
  • गतिविधियाँ

    व्यवस्था पर विमर्श

    राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संरक्षक के.एन. गोविन्दाचार्य की पहल पर गत माह 20-21 अगस्त, 2010 को दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई। उद्देश्य था उन सभी ताकतों को संगठित करना जो देश की मौजूदा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं और उसमें बदलाव या सुधार के लिए संघर्षरत हैं

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  • हरपाल की हिम्मत
  • इंदौर में सज्जन शक्ति की संगोष्ठी
  • चर्चा में

    महिला आरक्षण पर बने आम सहमति

    महिला आरक्षण पर बने आम सहमति

    बहुमत का मतलब ये नहीं कि आप कुछ भी पारित करवा लें और उसके विरोध को अलोकतांत्रिक घोषित कर दें। कई बार ऐसा होता है जब बहुमत से जनमत का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

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  • सरपंच पद की नीलामी
  • Union Budget 2010-11 : No Relief for Common Man
  • विविधा

    भूख से बिलबिलाता समाज

    भूख से बिलबिलाता समाज

    हाल ही में भारत में खाद्य पदार्थों के थोक मूल्य सूचकांक में रिकार्ड 16.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी के साथ यह उम्मीद जताई जा रही है कि पेट्रोलियम पदार्थों में हुई मूल्यवृद्धि से मुद्रास्फीती में मात्र 0.9 प्रतिशत की वृद्धि होगी। हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि वर्तमान में मुद्रा स्फीती की दर 10.2 प्रतिशत है। ऐसे में करीब एक प्रतिशत की वृद्धि का अर्थ समझना आवश्यक है। सरकार मूल्यवृद्धि को लेकर किए गए प्रत्येक निर्णय को एक ‘अरुचिकर फैसला’ कह कर बचने का प्रयास करती है

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  • केवल कानून से काम नहीं बनेगा
  • तिरंगा जिनके लिए भगवान है
  • साहित्य

    सेब

    सेब

    यह बिल्कुल स्वाभाविक था कि मैं पास जाकर बड़ी शराफत से पूछता, क्या बात है बेटी, तू इतनी घबराई हुई क्यों है? तुझे यहां कौन छोड़कर चला गया है? पर वह न उतनी घबराई हुई थी और न उसे वहां कोई छोड़कर चला गया था। क्योंकि उसके चेहरे पर एक गहरी आशा की दृढ़ता थी, यद्यपि वह आशा इसी बात की थी कि उसका बाप अभी आ जाएगा। इसलिए मैंने पूछा नहीं,

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  • शून्य से शिखर तक
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