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रोजी की राह में रोड़े बड़े (अफरोज आलम 'साहिल')
पिछले दिनों झालावाड़ के मनोहरथाना ब्लाक
में एक 'जन सुनवाई' हुई। इस 'जन सुनवाई' के बाद सामने आने
वाली भ्रष्टाचार की कहानियां वाकई पूरे देश को चौंकाने वाली हैं। घोटाले
हजारों में नहीं बल्कि लाखों और करोड़ों में थे। सिर्फ मनपसर ग्राम पंचायत
के एक छोटे से गांव में 2, 11, 720 रुपये का गबन एक ही कार्य में पाया गया।
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रोजगार के नाम पर छलावा (हिमांशु शेखर)
2005
में राष्ट्रीय
ग्रामीण रोजगार गारंटी
योजना देश के दो सौ जिलों में लागू
की
गई। उस वक्त इस महत्वाकांक्षी
योजना
को लेकर काफी लंबे-चौड़े वायदे
किए
गए। पर पिछले कुछ महीनों से
इस
तरह के कई
मामले सामने आ रहे
हैं जिनसे यह पता चल रहा है कि इस
योजना में भी भ्रष्टाचार का घुन लग चुका है और अफसरशाही ने तो
जैसे इसे असफल बनाने की ही ठान ली है।
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