![]() -विमल कुमार सिंह |
देश भर में फैलेगी गुलबर्गा की सुगंध
देश के विकास के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाकर देखने की बजाए, समाज को जगाना और उसे सक्रिय करना कितना कारगर हो सकता है, इसका बहुत बढ़िया उदाहरण पेश किया है कर्नाटक की संस्था ‘हैदराबाद कर्नाटक अभिवृद्धि विभाग’ ने। यहां बताते चलें कि हैदराबाद कर्नाटक में कर्नाटक के चार जिले -गुलबर्गा, बीदर, कोप्पल और रायचूर आते हैं। कर्नाटक के ये सबसे पिछड़े जिले माने जाते हैं।
महिलाएं बनी अमन की पहरेदार
ये महिलाएं अपने आप में बंदूकों से तबाह हुए कश्मीर में महिलाओं के जीवन की दुखद सच्चाइयों का जीता जागता उदाहरण ही नहीं हैं, वे अमन की गहरी चाहत की गवाही भी देती हैं। उनके अनुभव अंधेरे और अमन के मर्म को स्पर्श करते हैं। अपने हौसले से ये महिलाएं आज एक सशक्त संदेश दे रही हैं। अपने काम से उन्होंने बताया है कि उन रास्तों तक पहुंचो जिनसे तुम डरते हो। जटिलता के मर्म को छुओ। जोखिम व असुरक्षा के परे देखो।
The Other Side of Picture
Most of the newspapers and news channels are saying that this is the decade of India and 2010 is just a beginning of this great decade. But is it true? In fact it’s not true.
सिक्के पर श्रीराम
2744 सिक्कों में से 61 सिक्कों पर ‘थ्री मेन’ (तीन मानव आकृतियों) का अंकन है। इन मानव आकृतियों का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद मुद्राशास्त्रियों का मत है कि इन सिक्कों पर बायीं ओर से क्रमश: देवी सीता, श्रीराम और लक्ष्मण का अंकन हुआ है।
राष्ट्रवादी दृष्टिपत्र पर हुयी चर्चा
वर्तमान स्थिति में भारतपरस्त और गरीबपरस्त राजनीति की जरूरत बढ़ गई है। इसी बात को ध्यान में रखकर राष्ट्रवादी दृष्टिपत्र तैयार किया गया है। हमें सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है। इसलिए इस दृष्टिपत्र को समाज के हर क्षेत्र के लोगों के पास भेजा गया है। सभी से राय मशविरा करने के बाद 27-28 मार्च को संशोधित दृष्टिपत्र को दिल्ली में लोकार्पित किया जाएगा।-के.एन. गोविन्दाचार्य
अब निशाने पर कर्नाटक
आखिर, आर्संलर-मित्तल जैसे वैश्विक कारपोरेट समूह क्योंकर कर्णाटक में आक्रामक ढंग से घुसपैठ करने पर आमादा हैं। उसका मूल कारण है-अनेक खनिज पदार्थ और प्राकृतिक संसाधनों से उसका समृद्ध होना। देश में विद्यमान सर्वाधिक गुणवत्ता वाले कुल लौह अयस्क संसाधनों का 10 प्रतिशत कर्णाटक में है।
शिक्षा में साजिश
जिन 44 संस्थानों की मान्यता रद्द की गयी है, उसमें गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय भी है। 1902 में स्वामी श्रद्धानंद ने इसकी स्थापना ब्रिटिश शिक्षा पद्धति से मुकाबला करने के लिए की थी। अंग्रेजों के लिए यह संस्थान हमेशा आंख की किरकिरी बना रहा, लेकिन वे इसके प्रति जनसमर्थन को देखते हुए कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर पाए। विडंबना है कि जो कार्य अंग्रेज नहीं कर पाए, वह काम सोनिया गांधी की अगुवाई में चलने वाली कांग्रेस सरकार ने कर दिया।
दृष्टि : विरोधाभास
सारा जगत स्वतंत्रता के लिए लालायित रहता है फिर भी प्रत्येक जीव अपने बंधनों को प्यार करता है। यही हमारी प्रकृति की पहली दुरूह ग्रंथि और विरोधाभास है।

