![]() -श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय-तीन) |
गांधी के विचारों का दर्पण
किताब के बारे में गांधी जी ने स्वयं कहा है कि मेरी यह छोटी सी किताब इतनी निर्दोष है कि बच्चों के हाथ में भी यह दी जा सकती है। यह किताब द्वेष धर्म की जगह प्रेम धर्म सिखाती है। हिंसा की जगह आत्म-बलिदान को स्थापित करती है। और पशुबल के खिलाफ टक्कर लेने के लिए आत्मबल को खड़ा करती है।
ग्रामीणों की सशक्त आवाज बनता अखबार
ये अखबार किसी खास वर्ग की आवाज न रहकर पूरे गांव की आवाज बन गया है। उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण अखबार सिर्फ वर्ग विशेष की खबरें नहीं छापते, बल्कि गांव की समस्याओं और कुछ विशेष रूप में विश्व की घटनाओं को भी शामिल करते हैं। राष्ट्रीय परिदृश्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए इनमें से एक अखबार ‘खबर लहरिया’ को चमेली देवी जैन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
केंद्रीय बजट का ७% गावों को मिले
आज देश की 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। अत: केन्द्र सरकार के बजट की कम से कम 7 प्रतिशत राशि सीधे ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की जाए।
लोकतंत्र के प्राचीनतम प्रयोग
वर्तमान संसद की तरह ही प्राचीन समय में परिषदों का निर्माण किया गया था। जो वर्तमान संसदीय प्रणाली से मिलता-जुलता था। गणराज्य या संघ की नीतियों का संचालन इन्हीं परिषदों द्वारा होता था। इसके सदस्यों की संख्या विशाल थी।
‘हिन्द स्वराज’ पर संगोष्ठी
महात्मा गांधी द्वारा रचित लोकप्रिय और प्रेरणादायी पुस्तक ‘हिन्द स्वराज’ की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘हिन्द स्वराज और वर्तमान भारतीय संदर्भ’ विषय पर वाराणसी शहर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी 19 जून 2009 को सम्पन्न हुई।
सामाजिक दायित्व से दूर होती मीडिया
संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकारों के सार्वभौम घोषणा-पत्र की प्रस्तावना और घोषणा को पढ़ा जाये, जिसे महासभा ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया है, तो मालूम होगा कि शायद ही कोई राष्ट्र होगा जो वास्तव में अपने नागरिकों एवं अन्य देशों के निवासियों के जीवन को मानवाधिकारों की भावना के अनुकूल विकसित करने के प्रयास कर रहा है।
कर्मयोग
हमारे में जो कुछ भी विशेषता है, वह दूसरों के लिये है, अपने लिये नहीं। अगर सभी मनुष्य ऐसा करने लगे तो कोई भी बद्ध नहीं रहेगा, सब जीवन्मुक्त हो जायंगे।
कहानी : पिया घर आये
प्रेमपूर्वक एक-दूसरे को ऐसे देख रहे थे कि अगर संसार में जीते हुए केवल यही काम उन्हें करना होता तो कोई भी धार्मिक पुस्तक उनमें मोक्ष की इच्छा पैदा नहीं कर सकती थी।

