ग्रामविकास की पाठशाला

-दीपक चव्हाण
तुलसीराम बाला बोरकर 20 साल पहले अपना गांव छोड़कर दूसरे गांव में रोजी रोटी के लिए गये थे। लेकिन आज वो अपने गांव में बागवानी खेती करके नगदी उत्पाद ले रहे हैं। इसी साल दो एकड़ खेती में फूलों की उपज करके तुलसीराम बोरकर ने दो लाख तीस हजार रुपयो का नगद मुनाफा कमाया। बेरोजगार तुलसीराम गांव क्यों वापस आएं, गांव में ऐसा क्या परिवर्तन हुआ, बेरोजगारी और गरीबी से उठकर वो प्रगतशील किसान कैसे बने? इन सवालों के पीछे एक कामयाबी का सफर है। यह सफर सिर्फ तुलसीदास का नहीं बल्कि उनके गांव का है और गांव के अन्य किसानों का है। वो गांव जो आज पूरे देश के लिए ग्रामविकास की पाठशाला बन चुका है और जिसे ‘हिवरे बाजार’ कहा जाता है।
महात्मा गांधी ने कहा था, ‘सच्चा लोकतंत्र केन्द्र में बैठे हुये 20 आदमी नहीं चला सकते हैं, वह तो नीचे से हर एक गांव में लोगों द्वारा चलाई जानी चाहिये। सत्ता के केन्द्र इस समय दिल्ली, कलकत्ता व मुंबई जैसे महानगरों में हैं। मैं उसे भारत के सात लाख गांवों में बांटना …

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विशेष रिपोर्ट

सरकारी एजेंसी नहीं हैं पंचायतें

सरकारी एजेंसी नहीं हैं पंचायतें

सरकार ने ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून लागू कर पंचायतों को क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दे रखी है। किंतु यह तो मूलत: कार्यपालिका की जिम्मेदारी है जो पंचायतों के साथ साझा कर दी गई है। यदि पंचायतों को कार्यपालिका का हिस्सा समझकर देखा जाता है तब तो पंचायतों को वे तमाम सुविधाएं दी जानी चाहिए जो एक सरकारी विभाग को मिलती हैं।

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  • गांव वाले गांव को चलाएं
  • ग्राम पंचायतों को मिले आर्थिक अधिकार
  • सार्थक प्रयास

    ग्रामविकास की पाठशाला

    ग्रामविकास की पाठशाला

    गांव के सुधार एवं पुनर्निर्माण की बात ‘हिवरे बाजार’ के कुछ युवाओं में आई। उन्होंने एकजुट होकर संकल्प लिया कि सामूहिक प्रयास से गांव को सुधारा जाये। पहले तो इनकी बातों को लोगों ने हल्के में लिया। इनके संकल्पों को पानी का बुलबुला कहकर उपेक्षा की गई। लेकिन उनके दृढ़निश्चय को देखते हुए गांव वालो ने 9 अगस्त 1989 को ग्राम व्यवस्था की बागडोर इन युवाओं को सौंप दी।

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  • गुणों का गांव राजूखेड़ी
  • महिला पंचों ने बदली विकास की धारा
  • परिदृश्य

    मैं बीपीएल नहीं हूं

    मैं बीपीएल नहीं हूं

    राजस्थान के भरतपुर जिले में सरपंच पद की एक युवा महिला प्रत्याशी ऋचा ढेंकावत से बात करने पर पंचायतों में महिलाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाती है। प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ अंश

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  • चौखट तक सिमटा पंचायती राज
  • लीडरशिप के अभाव से गांव बदहाल
  • अतीत

    सिक्के पर श्रीराम

    सिक्के पर श्रीराम

    2744 सिक्कों में से 61 सिक्कों पर ‘थ्री मेन’ (तीन मानव आकृतियों) का अंकन है। इन मानव आकृतियों का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद मुद्राशास्त्रियों का मत है कि इन सिक्कों पर बायीं ओर से क्रमश: देवी सीता, श्रीराम और लक्ष्मण का अंकन हुआ है।

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  • प्राचीन भारत के शास्त्र
  • भारतीय मुद्रा के निर्माण की कहानी
  • गतिविधियाँ

    KALBURGI KAMPU 2010 : Bhoomi Poojan Ceremony

    KALBURGI KAMPU 2010 : Bhoomi Poojan Ceremony

    Bhoomi Poojan Ceremony for the proposed mega event “Kalburgi Kampu 2010″, was performed under the aegis of His Holiness Shri Revan Siddheshwar Swamiji of Gaddagimath on Saturday, 20th February 2010, at the Uppin Art Enclave, Gulbarga.

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  • ग्राम पंचायतों की आर्थिक आजादी की मांग
  • गुलबर्गा 2010 के लिए भूमि पूजन सम्पन्न
  • चर्चा में

    सरपंच पद की नीलामी

    सरपंच पद की नीलामी

    गांव के कुछ लोगों ने तय किया कि जो व्यक्ति मंदिर निर्माण के लिए सबसे ज्यादा पैसा देगा, उसे ही सरपंच बनाया जाएगा। लिहाजा मंदिर पर बोली लगाई गई और छह लाख पचपन हजार रुपए की अंतिम बोली के साथ सरपंच चुन लिया गया

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  • Rail Budget goes to Bengal
  • Union Budget 2010-11 : No Relief for Common Man
  • विविधा

    सामाजिक निगरानी से आएगी पंचायतों में पारदर्शिता

    सामाजिक निगरानी से आएगी पंचायतों में पारदर्शिता

    विवेक पवार समाज सेवी संस्था ‘विकल्प’ के अध्यक्ष हैं। अपनी संस्था के माध्यम से वे मध्य प्रदेश के मंडला बालाघाट जिले में लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनका कार्य प्रमुख तौर पर विस्थापन से उपजी समस्याओं का निराकरण, सरकारी योजनाओं तक गरीबों की पहुंच और पंचायती राज से संबंधित है। पंचायती राज विषय पर उनके विचार जानने के लिए उमाशंकर मिश्र ने उनसे साक्षात्कार लिया जो यहां प्रस्तुत है। (संपादक)

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  • पंचायत का इतिहास
  • पुस्तक समीक्षा : भारत में पंचायती राज
  • साहित्य

    कहानी : पंच परमेश्वर

    कहानी : पंच परमेश्वर

    आज मुझे ज्ञात हुआ कि पंच के पद पर बैठ कर न कोई किसी का दोस्त है, न दुश्मन। न्याय के सिवा उसे और कुछ नहीं सूझता। आज मुझे विश्वास हो गया कि पंच की जबान से खुदा बोलता है।

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  • कहानी : हीरा मोती
  • दृष्टि : विरोधाभास

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