देश भर में फैलेगी गुलबर्गा की सुगंध

-विमल कुमार सिंह
   हम बचपन से सुनते आए हैं कि भारत एक विकासशील देश है। हमें स्कूल की किताबों और नेताओं के भाषण में भी यही सुनने को मिला। हमें यह बताया गया कि विकास की दौड़ में इंग्लैंड, अमेरिका, जापान और रूस जैसे देश हमसे बहुत आगे निकल चुके हैं। जल्दी से जल्दी इन देशों की बराबरी करने या उनसे आगे निकलने की होड़ में हमने इन्हीं देशों की नकल करना शुरू कर दिया। हमने उन्हीं के तौर-तरीके अपना लिए। आजादी के बाद हमारे नेताओं ने विकास का सोवियत माडल अपनाया। उन्होंने हर काम सरकार के जिम्मे डाल दिया। अब जबकि रूसी सपना टूट गया है, देश का नेतृत्व अमेरिकी पूंजीवाद की गोद में जा बैठा है।
जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बाजार को दखलंदाजी करने की छूट दे दी गयी है। लेकिन, विकास की इन आयातित अवधारणाओं के बीच सौभाग्य से भारतीय परंपराओं की बात करने वाले भी हैं। इन लोगों का मानना है कि भारत में विकास के संदर्भ में जिस तरह सरकारवाद असफल हुआ है, उसी तरह बाजारवाद भी असफल होगा। यहां विकास की प्रक्रिया …

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विशेष रिपोर्ट

देश भर में फैलेगी गुलबर्गा की सुगंध

देश भर में फैलेगी गुलबर्गा की सुगंध

देश के विकास के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाकर देखने की बजाए, समाज को जगाना और उसे सक्रिय करना कितना कारगर हो सकता है, इसका बहुत बढ़िया उदाहरण पेश किया है कर्नाटक की संस्था ‘हैदराबाद कर्नाटक अभिवृद्धि विभाग’ ने। यहां बताते चलें कि हैदराबाद कर्नाटक में कर्नाटक के चार जिले -गुलबर्गा, बीदर, कोप्पल और रायचूर आते हैं। कर्नाटक के ये सबसे पिछड़े जिले माने जाते हैं।

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  • बदलाव की त्रासदी
  • बिगड़ते पर्यावरण से बढ़ेगा पलायन
  • सार्थक प्रयास

    महिलाएं बनी अमन की पहरेदार

    महिलाएं बनी अमन की पहरेदार

    ये महिलाएं अपने आप में बंदूकों से तबाह हुए कश्मीर में महिलाओं के जीवन की दुखद सच्चाइयों का जीता जागता उदाहरण ही नहीं हैं, वे अमन की गहरी चाहत की गवाही भी देती हैं। उनके अनुभव अंधेरे और अमन के मर्म को स्पर्श करते हैं। अपने हौसले से ये महिलाएं आज एक सशक्त संदेश दे रही हैं। अपने काम से उन्होंने बताया है कि उन रास्तों तक पहुंचो जिनसे तुम डरते हो। जटिलता के मर्म को छुओ। जोखिम व असुरक्षा के परे देखो।

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  • हौसलों का बादशाह -लुल्हवा
  • दक्षिण में हिन्दी के ध्वजवाहक
  • परिदृश्य

    The Other Side of Picture

    The Other Side of Picture

    Most of the newspapers and news channels are saying that this is the decade of India and 2010 is just a beginning of this great decade. But is it true? In fact it’s not true.

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  • भौतिकता का मकड़ जाल
  • Stimulus Package will Become Painful Soon
  • अतीत

    सिक्के पर श्रीराम

    सिक्के पर श्रीराम

    2744 सिक्कों में से 61 सिक्कों पर ‘थ्री मेन’ (तीन मानव आकृतियों) का अंकन है। इन मानव आकृतियों का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद मुद्राशास्त्रियों का मत है कि इन सिक्कों पर बायीं ओर से क्रमश: देवी सीता, श्रीराम और लक्ष्मण का अंकन हुआ है।

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  • प्राचीन भारत के शास्त्र
  • भारतीय मुद्रा के निर्माण की कहानी
  • गतिविधियाँ

    राष्ट्रवादी दृष्टिपत्र पर हुयी चर्चा

    राष्ट्रवादी दृष्टिपत्र पर हुयी चर्चा

    वर्तमान स्थिति में भारतपरस्त और गरीबपरस्त राजनीति की जरूरत बढ़ गई है। इसी बात को ध्यान में रखकर राष्ट्रवादी दृष्टिपत्र तैयार किया गया है। हमें सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है। इसलिए इस दृष्टिपत्र को समाज के हर क्षेत्र के लोगों के पास भेजा गया है। सभी से राय मशविरा करने के बाद 27-28 मार्च को संशोधित दृष्टिपत्र को दिल्ली में लोकार्पित किया जाएगा।-के.एन. गोविन्दाचार्य

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  • गौ-ग्राम यात्रा का समापन
  • राष्ट्रीय कवि संगम
  • चर्चा में

    अब निशाने पर कर्नाटक

    अब निशाने पर कर्नाटक

    आखिर, आर्संलर-मित्तल जैसे वैश्विक कारपोरेट समूह क्योंकर कर्णाटक में आक्रामक ढंग से घुसपैठ करने पर आमादा हैं। उसका मूल कारण है-अनेक खनिज पदार्थ और प्राकृतिक संसाधनों से उसका समृद्ध होना। देश में विद्यमान सर्वाधिक गुणवत्ता वाले कुल लौह अयस्क संसाधनों का 10 प्रतिशत कर्णाटक में है।

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  • झारखंड की सियासत का सच
  • जहर की खेती
  • विविधा

    शिक्षा में साजिश

    शिक्षा में साजिश

    जिन 44 संस्थानों की मान्यता रद्द की गयी है, उसमें गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय भी है। 1902 में स्वामी श्रद्धानंद ने इसकी स्थापना ब्रिटिश शिक्षा पद्धति से मुकाबला करने के लिए की थी। अंग्रेजों के लिए यह संस्थान हमेशा आंख की किरकिरी बना रहा, लेकिन वे इसके प्रति जनसमर्थन को देखते हुए कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर पाए। विडंबना है कि जो कार्य अंग्रेज नहीं कर पाए, वह काम सोनिया गांधी की अगुवाई में चलने वाली कांग्रेस सरकार ने कर दिया।

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  • वनवासी समाज का समग्र विकास
  • पिण्डदान की भूमि
  • साहित्य

    दृष्टि : विरोधाभास

    दृष्टि : विरोधाभास

    सारा जगत स्वतंत्रता के लिए लालायित रहता है फिर भी प्रत्येक जीव अपने बंधनों को प्यार करता है। यही हमारी प्रकृति की पहली दुरूह ग्रंथि और विरोधाभास है।

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  • दृष्टि : सत्याग्रह की लड़ाई

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